भारतीय टीवी ब्रॉडकास्टर्स ने 2022 से अब तक 114 चैनल लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। ट्रेडिशनल टीवी दर्शकों की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिसके चलते पे-DTH सब्सक्राइबर्स **72 मिलियन** से गिरकर **49 मिलियन** पर आ गए हैं।
टीवी इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव
भारतीय टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री एक बड़े दौर से गुजर रही है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से सितंबर 2026 के बीच ब्रॉडकास्टर्स ने 114 टीवी लाइसेंस सरेंडर किए हैं। यह कदम यह दिखाता है कि कैसे पारंपरिक लीनियर टीवी न केवल दर्शकों को, बल्कि विज्ञापन रेवेन्यू को भी खो रहा है।
क्यों घट रहे हैं सब्सक्राइबर्स?
पारंपरिक पे-टीवी का मॉडल गहरे संकट में है। एक समय में पे-DTH सब्सक्राइबर्स की संख्या 72 मिलियन के शिखर पर थी, जो 31 मार्च 2026 तक घटकर 49.05 मिलियन रह गई है। यानी करीब 23 मिलियन उपभोक्ता या तो DD Free Dish पर शिफ्ट हो गए हैं या फिर पूरी तरह से इंटरनेट-आधारित स्ट्रीमिंग की ओर चले गए हैं।
विज्ञापन और सरकारी पॉलिसी
Zee Entertainment और JioStar जैसे बड़े खिलाडियों के लिए विज्ञापनों में कमी एक बड़ी चुनौती है। FMCG कंपनियां अपने बजट को टीवी से हटाकर डिजिटल मीडिया की ओर ले जा रही हैं। हालांकि, सरकार ने अगस्त 2026 में 12-मिनट प्रति घंटे की विज्ञापन सीमा (Ad Cap) को हटाकर ब्रॉडकास्टर्स को थोड़ी राहत देने की कोशिश की है, लेकिन यह डिजिटल दिग्गजों के सामने टिके रहने के लिए एक कड़ा संघर्ष है।
सर्वाइवल का नया तरीका
चैनल लाइसेंस सरेंडर करना केवल मजबूरी नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने की रणनीति है। एक सैटेलाइट चैनल को बनाए रखने में भारी खर्च आता है, जिसमें DTH ऑपरेटरों को दी जाने वाली कैरिज फीस और सैटेलाइट ट्रांसपोंडर का खर्चा शामिल है। अब कंपनियां उन्हीं चैनलों पर फोकस कर रही हैं जो मुनाफे में हैं, जबकि बाकी पोर्टफोलियो को छोटा किया जा रहा है।
