भारतीय फिल्म स्टूडियो अब अपनी बड़ी फिल्मों को इंग्लिश डब में रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं। रामायण जैसी बड़ी फिल्मों के जरिए स्टूडियो का लक्ष्य केवल प्रवासी भारतीयों तक सीमित न रहकर ग्लोबल मेनस्ट्रीम दर्शकों को आकर्षित करना है।
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री अब अपने बिजनेस मॉडल में बड़े बदलाव की ओर है। अब तक भारतीय फिल्में विदेशों में मुख्य रूप से भारतीय प्रवासियों (diaspora) पर निर्भर थीं, लेकिन अब स्टूडियो का इरादा ग्लोबल ऑडियंस को सीधे टारगेट करने का है।
दर्शकों की बदलती आदतें
OTT प्लेटफॉर्म्स के दौर में दुनिया भर के दर्शक अब अलग-अलग भाषाओं की फिल्में देखने के आदी हो गए हैं। डबिंग और सबटाइटल के कारण विदेशी दर्शकों के लिए भारतीय फिल्में देखना आसान हो गया है। इसी को भुनाते हुए स्टूडियो अपनी फिल्मों को अब 'निश कल्चरल एक्सपोर्ट' के बजाय 'मेनस्ट्रीम ग्लोबल सिनेमा' के तौर पर पेश कर रहे हैं।
ग्लोबल दांव के जोखिम
मीडिया कंपनियों के लिए यह एक बड़ा मौका तो है, लेकिन इसमें वित्तीय जोखिम भी हैं। ग्लोबल स्तर पर रिलीज करने के लिए बड़े बजट की जरूरत होती है और इंटरनेशनल मार्केटिंग पर काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। अब भारतीय स्टूडियो का मुकाबला सीधे हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर्स से है, जहां प्रीमियम स्क्रीन स्पेस सीमित है।
अगर फिल्म इंटरनेशनल बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक परफॉर्म नहीं करती, तो भारी-भरकम प्रोडक्शन और मार्केटिंग खर्च कंपनी के मुनाफे पर सीधा असर डाल सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?
'RRR' की ग्लोबल कामयाबी ने यह साबित कर दिया है कि सही मार्केटिंग के साथ भारतीय कंटेंट कमाल कर सकता है। निवेशकों के लिए अब अगले कुछ महीनों में यह देखना अहम होगा कि इन फिल्मों का ग्लोबल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कैसा रहता है। इसके अलावा, कंपनी के आने वाले फाइनेंशियल रिपोर्ट्स में यह साफ होगा कि क्या यह ग्लोबल विस्तार वास्तव में प्रॉफिट को बढ़ा रहा है या केवल प्रोडक्शन हाउस पर कर्ज का बोझ डाल रहा है।
