भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स अब अपनी रणनीति बदल रहे हैं। साल 2026 में माइक्रो-ड्रामा और K-Dramas की लोकप्रियता में **50%** तक का इजाफा देखा गया है। कम लागत और युवाओं की पसंद को देखते हुए कंपनियां अब बड़े बजट वाले शो के बजाय शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट पर दांव लगा रही हैं।
भारत के ओवर-द-टॉप (OTT) स्ट्रीमिंग मार्केट में साल 2026 में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव देखने को मिल रहा है। Ormax Media के डेटा के अनुसार, दर्शक अब लंबे ओरिजिनल शो के बजाय माइक्रो-ड्रामा, K-Dramas और एनिमे (Anime) की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो माइक्रो-ड्रामा की व्यूअरशिप में 50%, K-Dramas में 48% और एनिमे में 32% की जोरदार ग्रोथ दर्ज की गई है। भारत के 664 मिलियन से ज्यादा OTT यूजर्स अब 'बाइट-साइज' एंटरटेनमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्यों बदल रही है कंपनियों की रणनीति?
निवेशकों के लिए यह बदलाव सीधे तौर पर 'कॉस्ट एफिशिएंसी' (Cost Efficiency) का मामला है। एक माइक्रो-ड्रामा एपिसोड की प्रोडक्शन कॉस्ट महज ₹20,000 से ₹50,000 के बीच आती है, जबकि पारंपरिक लॉन्ग-फॉर्म ओरिजिनल शो पर औसतन ₹25 लाख का खर्च होता है। इस बड़े अंतर के कारण प्लेटफॉर्म्स अब अपनी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी को री-इवैल्यूएट कर रहे हैं। मिड-टियर लॉन्ग-फॉर्म ड्रामा के प्रोडक्शन वॉल्यूम में 2025 में ही 13% की गिरावट देखी गई है।
मार्केट का भविष्य और मुनाफे का गणित
माइक्रो-ड्रामा मार्केट के FY26 में ₹2,300 करोड़ से बढ़कर FY32 तक ₹23,500 करोड़ से ₹25,500 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। Zee Entertainment और Netflix जैसी बड़ी कंपनियां अब अपने लाइब्रेरी मिक्स को बदलते हुए मोबाइल-फर्स्ट युवाओं को टारगेट कर रही हैं।
हालांकि, यह बदलाव रिस्क से खाली नहीं है। प्लेटफॉर्म्स को अब केवल सब्सक्रिप्शन मॉडल पर निर्भर रहने के बजाय विज्ञापन-आधारित हाइब्रिड मॉडल (Hybrid Monetization) पर फोकस करना होगा। बढ़ते कंपटीशन और नए माइक्रो-ड्रामा ऐप्स के आने से मार्जिन और रिटेंशन कॉस्ट पर दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में यह ट्रैक करना होगा कि कंपनियां कैसे विज्ञापन रेवेन्यू के जरिए सब्सक्रिप्शन की सुस्ती को कवर करती हैं और प्रोडक्शन की क्वालिटी को बरकरार रखती हैं।
