PwC की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर 2030 तक **$36.7 बिलियन** तक पहुंच जाएगा। इंडस्ट्री में **7.4%** की सालाना ग्रोथ देखने को मिल रही है, जहां अब फोकस यूजर बढ़ाने के बजाय सस्टेनेबल मोनेटाइजेशन और डिजिटल कंटेंट पर है।
ग्रोथ की रफ्तार
PwC की 'ग्लोबल एंटरटेनमेंट एंड मीडिया आउटलुक 2026-2030' रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय मीडिया सेक्टर 7.4% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से आगे बढ़ रहा है, जो वैश्विक औसत 4% से कहीं ज्यादा है।
डिजिटल विज्ञापन का दबदबा
इस ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन 'इंटरनेट एडवर्टाइजिंग' बनने वाला है। उम्मीद है कि यह रेवेन्यू दशक के अंत तक $14.3 बिलियन के स्तर पर पहुंच जाएगा, जिसकी सालाना ग्रोथ रेट 13.9% रहने का अनुमान है। कंपनियाँ अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रही हैं ताकि कंटेंट डिलीवरी और टारगेट ऑडियंस तक पहुँच को बेहतर बनाया जा सके।
ट्रेडिशनल मीडिया की मजबूती
दिलचस्प बात यह है कि दुनिया भर में गिरावट के बावजूद, भारत में टीवी और प्रिंट अभी भी मजबूती दिखा रहे हैं। 2030 तक भारतीय टीवी का रेवेन्यू $7.5 बिलियन और न्यूजपेपर का रेवेन्यू $3.5 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। क्षेत्रीय बाजारों (Regional Markets) का भरोसा इस सेक्टर के लिए संजीवनी का काम कर रहा है।
नए उभरते सेगमेंट
- OTT प्लेटफॉर्म्स: ये अब सब्सक्रिप्शन और विज्ञापन दोनों मॉडल्स पर फोकस कर रहे हैं, जिसका रेवेन्यू $3.6 बिलियन तक पहुँच सकता है।
- गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स: यह सेगमेंट $2.6 बिलियन का मार्केट बनाने की राह पर है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालांकि भविष्य उज्जवल है, लेकिन कंपनियों को अपने खर्चों (Operational discipline) पर नजर रखनी होगी। विज्ञापन से होने वाली कमाई पर निर्भरता के कारण, यह सेक्टर आर्थिक उतार-चढ़ाव (Economic cycles) के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियाँ AI और नई टेक्नोलॉजी को अपनाते समय खर्चों को कितना नियंत्रित रखती हैं।
