Indian Festive Ad Spend: त्योहारों पर कंपनियों का खर्च ₹62,000 करोड़ के पार, मार्केटिंग रणनीति में बड़ा बदलाव

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Festive Ad Spend: त्योहारों पर कंपनियों का खर्च ₹62,000 करोड़ के पार, मार्केटिंग रणनीति में बड़ा बदलाव

साल 2026 में भारतीय फेस्टिव सीजन के दौरान विज्ञापन खर्च **17%** बढ़कर **₹62,000 करोड़** तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, आरबीआई की ब्याज दरों और ग्रामीण मांग को लेकर चिंता के बीच कंपनियां सतर्क रुख अपना रही हैं और अपना बजट क्विक कॉमर्स की तरफ शिफ्ट कर रही हैं।

भारत का एडवर्टाइजिंग सेक्टर साल 2026 के त्योहारी सीजन के लिए कमर कस रहा है। प्रोजेक्शंस के मुताबिक, इस साल विज्ञापन खर्च ₹60,000 करोड़ से ₹62,000 करोड़ के दायरे में रह सकता है, जो सालाना आधार पर 13% से 17% की वृद्धि है। हालांकि, इस ग्रोथ के पीछे कंपनियों की बदली हुई रणनीति साफ दिख रही है। अब ब्रांड्स पुराने ढर्रे के विज्ञापन छोड़ डिजिटल और क्विक कॉमर्स पर दांव लगा रहे हैं।

क्विक कॉमर्स और डिजिटल पर जोर

मार्केटिंग बजट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस साल रिटेल मीडिया और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में खर्च 50% तक बढ़ने का अनुमान है। कंपनियों ने गौर किया है कि उपभोक्ता अब महंगी वस्तुओं के बजाय अधिक ऑर्डर देने पर ध्यान दे रहे हैं। इसे देखते हुए विज्ञापनदाता अब सेलिब्रिटी-आधारित विज्ञापनों के बजाय सीधे कन्वर्जन देने वाले प्लेटफॉर्म्स पर फंड खर्च कर रहे हैं। रिटेल मीडिया और ई-कॉमर्स विज्ञापन बजट में ₹11,500 करोड़ का हिस्सा लेंगे, जो पिछले साल के मुकाबले 27% अधिक है।

मैक्रो इकोनॉमिक चुनौतियां और सावधानी

उत्साह के बावजूद कॉर्पोरेट लीडर्स सतर्क हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट को 5.50% पर रखने के कारण कर्ज महंगा हुआ है, जिससे महंगी वस्तुओं की मांग पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, मानसून में 13% की कमी के कारण ग्रामीण इलाकों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) भी दबाव में है। FMCG और ऑटो कंपनियां अब छोटे पैकेजिंग और बजट-अनुकूल मार्केटिंग पर ध्यान दे रही हैं ताकि वॉल्यूम बना रहे।

निवेशकों के लिए अहम संकेत

निवेशकों को यह ट्रैक करना चाहिए कि विज्ञापन पर किया गया यह भारी खर्च कंपनियों के मार्जिन पर कितना दबाव डालता है। यदि सेल्स में उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं आती है, तो मुनाफे पर असर पड़ सकता है। आने वाले क्वार्टरली नतीजों में FMCG, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखें कि उनका मार्केटिंग ROI कैसा रहा है और क्या कंपनी ग्रामीण मांग की चुनौतियों से पार पा रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.