Indian Creator Economy: 'क्रिएटर-प्रेन्योर' बनने की राह हुई महंगी, सालाना खर्च ₹30 लाख तक पहुंचा

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Creator Economy: 'क्रिएटर-प्रेन्योर' बनने की राह हुई महंगी, सालाना खर्च ₹30 लाख तक पहुंचा

भारत के डिजिटल क्रिएटर्स अब साधारण स्पॉन्सरशिप से आगे बढ़कर स्वतंत्र बिजनेस खड़ा कर रहे हैं। इस 'क्रिएटर-प्रेन्योरशिप' के दौर में कानूनी और कंप्लायंस का खर्च सालाना **₹3 लाख से ₹30 लाख** के बीच पहुंच गया है, जो छोटे क्रिएटर्स के लिए एक बड़ी चुनौती है।

भारत का क्रिएटर इकोसिस्टम एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब क्रिएटर्स केवल ब्रांड एंडोर्समेंट तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे अपने मीडिया चैनल, प्रोडक्शन स्टूडियो और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर ब्रांड्स खड़े कर रहे हैं। इस बदलाव ने जहां स्थिरता की राह दिखाई है, वहीं काम करने की जटिलता भी बढ़ा दी है।

बढ़ता कानूनी और कंप्लायंस बोझ

क्रिएटर से फाउंडर बनने की इस प्रक्रिया में ऑपरेटिंग कॉस्ट में भारी उछाल आया है। अब उन्हें कंटेंट कैलेंडर के साथ-साथ इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) प्रोटेक्शन, ट्रेडमार्क फाइलिंग और कॉम्प्लेक्स लाइसेंसिंग एग्रीमेंट्स पर भी ध्यान देना पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, सामान्य ऑपरेशन्स के लिए कानूनी खर्च ₹3 लाख से ₹5 लाख सालाना आता है। वहीं, अगर कोई क्रिएटर क्रॉस-बॉर्डर लाइसेंसिंग या इक्विटी पार्टनरशिप जैसे जटिल काम करता है, तो यह खर्चा ₹30 लाख तक जा सकता है।

स्पॉन्सरशिप पर निर्भरता में कमी

क्रिएटर्स अब खुद को फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट बनाने पर जोर दे रहे हैं। साल 2021 में क्रिएटर्स की कुल इनकम में स्पॉन्सरशिप की हिस्सेदारी 91% थी, जो साल 2026 तक घटकर 59% रह गई है। कॉर्पोरेट जगत भी इस बदलाव को भांप रहा है, जिसके चलते साल 2020 से 2026 की शुरुआत के बीच भारत में क्रिएटर-रिलेटेड जॉब पोस्टिंग में 919% की भारी तेजी देखी गई है।

चुनौतियां और एंट्री बैरियर

इस ग्रोथ के बीच कई जोखिम भी खड़े हैं। आज भी 56% फुल-टाइम क्रिएटर्स लिविंग वेज से कम कमा रहे हैं। ऐसे में कानूनी और प्रशासनिक कंप्लायंस का भारी खर्च नए और छोटे क्रिएटर्स के लिए एक बड़ी बाधा बन गया है। खासकर फाइनेंस और इंश्योरेंस जैसे रेगुलेटेड सेक्टर में काम करने वाले क्रिएटर्स पर कड़े डिस्क्लोजर नियमों का पालन करने का दबाव है, जिसके लिए उन्हें हर कदम पर महंगी कानूनी सलाह लेनी पड़ रही है। भविष्य में इस सेक्टर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्रिएटर-लेड बिजनेस अपनी प्रोडक्शन बजट और कानूनी खर्चों के बीच कैसे तालमेल बिठाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.