त्योहारी सीजन में भारतीय कंज्यूमर ब्रांड्स अपने मार्केटिंग बजट को ऑप्टिमाइज करने के लिए AI का सहारा ले रहे हैं। ₹60,000 करोड़ के इस एडवर्टाइजिंग मार्केट में RENÉE Cosmetics और Ferns N Petals जैसे ब्रांड्स AI का इस्तेमाल कर न केवल प्रोडक्शन का समय बचा रहे हैं, बल्कि एंगेजमेंट भी बढ़ा रहे हैं।
भारत के एडवर्टाइजिंग सेक्टर में इस फेस्टिव सीजन एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सालाना करीब ₹60,000 करोड़ से ₹62,000 करोड़ के भारतीय एडवर्टाइजिंग मार्केट का 35% हिस्सा केवल फेस्टिव सीजन से आता है। ऐसे में कंपनियों पर खर्च कम करने और एफिशिएंसी बढ़ाने का भारी दबाव है। कंपनियां अब उन पारंपरिक विज्ञापनों से दूर हो रही हैं, जिनका एक प्रोडक्शन शूट ₹50 लाख से भी ज्यादा महंगा पड़ता था।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार
इस बदलाव का सीधा असर कंपनियों के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर दिख रहा है। RENÉE Cosmetics का कहना है कि AI-आधारित विज्ञापनों से उनके एंगेजमेंट में 30% का उछाल आया है और प्रोडक्शन का समय 80% तक घट गया है। इसी तरह, Ferns N Petals ने अपनी क्रिएटिव एक्जीक्यूशन स्पीड को 4 गुना बढ़ा लिया है। निवेशकों के लिए यह एक अच्छा संकेत है, क्योंकि कंपनियां अब इन बचत को सप्लाई चेन सुधारने और अपने डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) अनुभव को बेहतर बनाने में लगा रही हैं।
तकनीक और क्रिएटिविटी का संतुलन
हालांकि, तकनीक के फायदे तो हैं, लेकिन इंडोबेव्स (IndoBevs) जैसे ब्रांड्स का मानना है कि केवल AI पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। अगर ब्रांड्स ने पूरी तरह मशीन-जेनरेटेड कंटेंट पर भरोसा किया, तो विज्ञापन में वो भावनात्मक जुड़ाव (storytelling) कम हो सकता है। भारतीय रिटेल मार्केट में क्रिएटिव जजमेंट आज भी एक बड़ा अंतर पैदा करने वाला फैक्टर है।
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनियां अपनी ऑपरेटिंग मार्जिन को कैसे मैनेज करती हैं। क्या एआई के जरिए होने वाली ये बचत लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न और मार्जिन में तब्दील हो पाएगी? यह आने वाले समय में ब्रांड्स की ग्रोथ को ट्रैक करने का सबसे बड़ा पैमाना होगा।
