थियेटर की वापसी, डिजिटल की गिरावट
2025 में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के बॉक्स ऑफिस रेवेन्यू ने ₹13,000 करोड़ का रिकॉर्ड छुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 14% की बड़ी छलांग है। इस ग्रोथ का मुख्य कारण टिकट की ऊंची कीमतें (higher ticket prices) और पॉपुलर फिल्मों में दर्शकों की भारी भीड़ रही। इस मजबूत प्रदर्शन से PVR INOX जैसे एग्जिबिटर्स (exhibitors) को फायदा हो रहा है, जिनके पास भारत भर में 1,754 से अधिक स्क्रीन हैं। यह रिकवरी उन्हें प्री-पैंडेमिक प्रॉफिट मार्जिन और कैश फ्लो को वापस पाने में मदद कर सकती है। मार्च 2026 तक PVR INOX का फॉरवर्ड P/E रेश्यो (forward P/E ratio) लगभग 24.9 है, जो निवेशकों के भविष्य के विकास में भरोसे को दर्शाता है। इसके विपरीत, फिल्मों के डिजिटल राइट्स (digital rights) और स्ट्रीमिंग रेवेन्यू में 7% की गिरावट आई है, जो घटकर ₹2,900 करोड़ रह गया। इसकी वजह स्ट्रीमिंग सर्विसेज द्वारा कंटेंट की खरीदारी कम करना है, जिसमें Disney+ Hotstar और JioCinema के मर्जर से बनी JioHotstar जैसी इंडस्ट्री के कंसोलिडेशन (consolidation) का भी असर है।
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स का बदला नज़रिया
बदलते बाजार को देखते हुए बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स अपनी स्ट्रेटेजी (strategy) में बदलाव कर रहे हैं। Amazon Prime Video अब भारत को ग्लोबल कंटेंट एक्सपोर्ट करने की जगह के तौर पर देख रहा है, और ऐसे लोकल शोज पर फोकस कर रहा है जिनकी अपील इंटरनेशनल हो। यह प्लेटफॉर्म्स कुछ फिल्मों के लिए थियेटर-फर्स्ट मॉडल (theatrical-first model) भी अपना रहा है। इसी तरह, JioHotstar अगले पांच सालों में साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्रीज से कंटेंट पर करीब $444 मिलियन का निवेश कर रहा है, खासकर उन फिल्मों पर जो थियेटर में अच्छा कर चुकी हैं। इसका मकसद इन क्षेत्रों में बढ़ते दर्शकों तक पहुंचना है, जहां लोग प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय बिताते हैं।
मार्केट ग्रोथ और नए ट्रेंड्स
कुल मिलाकर, भारतीय मीडिया और मनोरंजन (M&E) सेक्टर में 9% की सालाना ग्रोथ देखी गई है, जिसकी रेवेन्यू ₹2.78 ट्रिलियन तक पहुंच गई और 2028 तक ₹3.3 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यह दिखाता है कि डिजिटल और ट्रेडिशनल फॉर्मेट्स साथ-साथ चल रहे हैं। हॉलीवुड स्टूडियोज़ ने थियेटर रन को औसतन 58.3 दिन तक बढ़ाया है, लेकिन भारत में 26 से 45 दिन का विंडो (window) सिनेमा के एक्साइटमेंट और स्ट्रीमिंग की जरूरत के बीच संतुलन बनाने के लिए काफी अच्छा साबित हो रहा है। साउथ इंडियन फिल्में हिंदी मार्केट में पॉपुलर हो रही हैं, जबकि बॉलीवुड की अपनी कंटेंट को चुनौती मिल रही है।
रिकवरी पर मंडराते खतरे
हालांकि, सिनेमाघरों की रिकवरी पर कुछ खतरे भी मंडरा रहे हैं। PVR INOX जैसे एग्जिबिटर्स की हाई वैल्यूएशन (high valuation) निवेशकों की उम्मीदों को दर्शाती है, जिस पर किसी भी आर्थिक मंदी (economic slowdown) या बदलते कंज्यूमर टेस्ट का असर पड़ सकता है। डिजिटल रेवेन्यू भले ही कम हुआ हो, पर डिजिटल मीडिया सेक्टर विज्ञापन (advertising) के दम पर अब भी हावी है। ऐसे में OTT प्लेटफॉर्म्स फिल्म राइट्स खरीदने की जगह अपने प्रोडक्शन या कम लागत वाले कंटेंट पर ज्यादा फोकस कर सकते हैं। इसके अलावा, बॉलीवुड का डब्ड साउथ इंडियन फिल्मों पर बढ़ता निर्भरता इसकी ओरिजिनैलिटी (originality) पर सवाल खड़े करती है। पायरेसी (Piracy) भी सिनेमा और स्ट्रीमिंग दोनों के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई है।
आगे का रास्ता
भारतीय मीडिया और मनोरंजन सेक्टर के 2028 तक ₹3.3 ट्रिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें डिजिटल मीडिया, लाइव इवेंट्स और फिल्म प्रोडक्शन ग्रोथ को लीड करेंगे। मौजूदा थियेटर-फर्स्ट मॉडल फिलहाल टिकाऊ लग रहा है, जो फ्रेंचाइजी वैल्यू बनाने और सिनेमा के कल्चरल इम्पैक्ट (cultural impact) के फायदों पर आधारित है। पर इसकी सफलता दर्शकों के सिनेमा के अनुभव को पसंद करते रहने और प्लेटफॉर्म्स के थिएटर रन व डिजिटल रिलीज के बीच एक प्रॉफिटेबल बैलेंस बनाने पर निर्भर करेगी। यह संतुलन बदलता रहेगा।
