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OTT Platforms का बड़ा गेम प्लान! अब सब्सक्राइबर नहीं, 'मुनाफे' पर ज़ोर; Ads और Cricket बनेंगे नए हथियार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
OTT Platforms का बड़ा गेम प्लान! अब सब्सक्राइबर नहीं, 'मुनाफे' पर ज़ोर; Ads और Cricket बनेंगे नए हथियार
Overview

India के Over-The-Top (OTT) स्ट्रीमिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव आया है। अब सब्सक्राइबर बढ़ाने की होड़ से हटकर, ये प्लेटफॉर्म्स सीधे **प्रॉफिट (Profit)** कमाने पर ज़ोर दे रहे हैं। इसकी मुख्य वजह हैं - ग्राहकों की कीमत के प्रति संवेदनशीलता और निवेशकों का दबाव, जिसके चलते अब **ऐड-सपोर्टेड टियर (Ad-supported tiers)** और **हाइब्रिड (Hybrid)** कमाई के मॉडल अपनाए जा रहे हैं। इसमें **क्रिकेट** जैसे बड़े दर्शक वर्ग को आकर्षित करने वाले इवेंट्स की भूमिका अहम हो गई है।

India का OTT स्ट्रीमिंग मार्केट एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब सिर्फ सब्सक्राइबर की गिनती बढ़ाने के बजाय, इन प्लेटफॉर्म्स का पूरा फोकस प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर है। मार्केट में ग्राहकों की कीमत को लेकर संवेदनशीलता और निवेशकों की लगातार मुनाफे की मांग इस बदलाव का मुख्य कारण है।

'सब्सक्रिप्शन-फ्रेंडली' मार्केट की सीमाएं

Ormax Media के मुताबिक, India में केवल 30-40 मिलियन (3-4 करोड़) यूज़र्स ही सब्सक्रिप्शन-आधारित मॉडल के लिए तैयार हैं। जबकि OTT का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या 600 मिलियन (60 करोड़) से ज़्यादा है, पर पेड सब्सक्रिप्शन केवल 148 मिलियन (14.8 करोड़) लोगों के पास है। इसका मतलब है कि ज़्यादातर यूज़र्स ऐड-सपोर्टेड या फ्री टियर का इस्तेमाल करते हैं। यहीं डिजिटल एड मार्केट उम्मीद की किरण दिखाता है, जिसके 15% सालाना की दर से बढ़कर 2029 तक $17-19 बिलियन (लगभग ₹1.4 लाख करोड़ से ₹1.6 लाख करोड़) तक पहुँचने का अनुमान है।

कमाई के नए रास्ते: एडवरटाइजिंग और हाइब्रिड मॉडल

कमाई के नए तरीके के तौर पर हाइब्रिड मॉडल अब मुख्य रणनीति बन गया है, जिसमें सब्सक्रिप्शन के साथ-साथ विज्ञापन भी शामिल हैं। यह उन करोड़ों यूज़र्स से कमाई का मौका देता है जो सब्सक्रिप्शन नहीं ले सकते। Media Partners Asia का अनुमान है कि अगले दस सालों में 70% से ज़्यादा ग्रोथ ऐड-लेंड ग्रोथ से ही आएगी। JioHotstar ने फ्री IPL स्ट्रीमिंग से 300 मिलियन (30 करोड़) से ज़्यादा यूज़र्स जोड़े। Netflix जैसी कंपनियां भी दुनिया भर में ऐड टियर पर विचार कर रही हैं। भारत में औसत प्रति यूज़र कमाई (ARPU) करीब $0.50 (करीब ₹40) मासिक है, ऐसे में बड़े पैमाने पर यूज़र बेस और कमाई के अलग-अलग स्रोत मुनाफे के लिए ज़रूरी हैं।

कंटेंट में बदलाव: आर्ट और कॉमर्स का संतुलन

प्रॉफिट पर फोकस की वजह से कंटेंट चुनने का तरीका भी बदल रहा है। अब प्लेटफॉर्म्स ऐसे फॉर्मेट्स को तरजीह दे रहे हैं जो ब्रांड पार्टनरशिप और स्पॉन्सरशिप के लिए ज़्यादा मुफीद हों, जैसे रियलिटी शो और डॉक्यूमेंट्री। ये 'एडवर्टाइज़र-फ्रेंडली' (Advertiser-friendly) ऑप्शन ब्रांड्स को कनेक्ट करने के ज़्यादा मौके देते हैं। ऐसा भी देखा जा रहा है कि थिएटर में रिलीज़ हुई फिल्में OTT पर ओरिजिनल वेब सीरीज़ से ज़्यादा देखी जा रही हैं, क्योंकि उनके बारे में लोगों को पहले से पता होता है और मार्केटिंग का खर्च भी कम होता है। हालांकि, प्लेटफॉर्म्स अभी भी टॉप-टियर ओरिजिनल्स में निवेश कर रहे हैं, लेकिन कंटेंट का बजट कम किया जा रहा है।

क्रिकेट: दर्शकों को बांधे रखने का सबसे बड़ा इंजन

लाइव स्पोर्ट्स, खासकर क्रिकेट, भारतीय OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए दर्शकों को जोड़ने का सबसे बड़ा और अहम टूल है। हफ़्ते भर की क्रिकेट व्यूअरशिप 150-200 मिलियन (15-20 करोड़) तक पहुँच सकती है, जो बड़ी फिल्मों या सीरीज़ से कहीं ज़्यादा है। यह भारी दर्शक वर्ग न केवल नए यूज़र्स लाता है, बल्कि कीमती विज्ञापन भी आकर्षित करता है, जिससे स्पोर्ट्स राइट्स पैसे कमाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

मार्जिन पर दबाव और स्केलेबिलिटी की चुनौतियां

तेजी से बढ़ते डिजिटल एड मार्केट के बावजूद, India के OTT मार्केट को टिकाऊ मुनाफे के लिए बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कम ARPU एक लगातार समस्या बनी हुई है, जो कंटेंट पर भारी खर्च (खासकर स्पोर्ट्स और ओरिजिनल्स) के कारण और बढ़ जाती है। JioHotstar, Netflix, Amazon Prime Video जैसे ग्लोबल और लोकल प्लेयर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा, यूज़र एक्विजिशन की लागत को बढ़ा रही है। IPL जैसे बड़े इवेंट्स पर निर्भरता के बाद यूज़र्स को बनाए रखना भी मुश्किल है। कंटेंट पाइरेसी भी एक बड़ी वित्तीय समस्या बनी हुई है। दर्शकों के माप का एक स्वतंत्र तरीका न होने से विज्ञापनदाताओं के लिए प्लेटफॉर्म्स की तुलना करना मुश्किल हो जाता है।

भविष्य की ओर: ग्रोथ और स्थिरता का संतुलन

India का OTT मार्केट परिपक्व हो रहा है और ग्रोथ के साथ-साथ स्थिरता का संतुलन बना रहा है। भविष्य में ऐड-सपोर्टेड मॉडल, एडवांस्ड हाइब्रिड मोनेटाइजेशन, और डेटा-आधारित कंटेंट के चुनाव पर ज़ोर रहेगा। Connected TV (CTV) यूज़र्स में 87% की बढ़ोतरी बड़ी स्क्रीन की ओर इशारा करती है, जो नए विज्ञापन अवसरों को खोलेगी। जैसे-जैसे पारंपरिक टीवी का दर्शक वर्ग घट रहा है, वैसे-वैसे ज़्यादा विज्ञापन पैसा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर बढ़ रहा है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि डिजिटल एड मार्केट 2029 तक $17-19 बिलियन और कुल डिजिटल वीडियो/OTT रेवेन्यू 2030 तक $9.17 बिलियन तक पहुँच जाएगा।

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