साल 2026 में भारत का ओटीटी (OTT) ऑडियंस बेस **66.49 करोड़** तक पहुंच गया है। वहीं, कनेक्टेड टीवी (CTV) के इस्तेमाल में **60%** की भारी उछाल देखने को मिली है, जो बड़े पर्दे पर कंटेंट देखने के बढ़ते चलन को दर्शाती है।
बाजार का विस्तार और आंकड़े
भारत की डिजिटल स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री ने 2026 में एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। अब देश की लगभग 45% आबादी ओटीटी कंटेंट देख रही है। ओर्मेक्स ओटीटी ऑडियंस रिपोर्ट (Ormax OTT Audience Report) के अनुसार, दर्शक हर हफ्ते औसतन 14.9 घंटे डिजिटल वीडियो प्लेटफॉर्म पर बिता रहे हैं, जो कुल मिलाकर सालाना 51,700 करोड़ घंटे होता है।
कनेक्टेड टीवी (CTV) का दौर
इस इंडस्ट्री में सबसे बड़ा बदलाव 'कनेक्टेड टीवी' की स्वीकार्यता है। इसके एक्टिव यूजर्स 60% बढ़कर 20.69 करोड़ हो गए हैं। यह बदलाव मोबाइल-ओनली मार्केट से 'टू-स्क्रीन इकोसिस्टम' की ओर शिफ्ट हो रहा है, जहां घर के लोग अब स्मार्टफोन के साथ-साथ टीवी का भी जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। बड़ी स्क्रीन होने के कारण व्यूअरशिप का समय और जुड़ाव भी बढ़ रहा है।
कमाई की चुनौती (Monetization Hurdles)
भले ही पहुंच बढ़ गई है, लेकिन कमाई का गणित अब भी उलझा हुआ है। कुल 66.5 करोड़ के ऑडियंस बेस के मुकाबले पेड सब्सक्रिप्शन केवल 17.26 करोड़ ही हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 16% की बढ़ोतरी है। इसमें से बड़ा हिस्सा टेलीकॉम बंडल्स और एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स के जरिए आता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में ग्राहकों की भारी प्राइस सेंसिटिविटी के चलते कंपनियों के लिए सब्सक्रिप्शन फीस बढ़ाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भविष्य की राह
कंपनियों के सामने अब कंटेंट की लागत को नियंत्रित करने और ग्राहक टिके रहने (Churn control) की बड़ी चुनौती है। माइक्रो-ड्रामा (50% ग्रोथ), के-ड्रामा (48%) और एनिमे (32%) जैसे कंटेंट की बढ़ती मांग यह बताती है कि दर्शक अब विविधता की ओर बढ़ रहे हैं। निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि प्लेटफॉर्म कैसे फ्री दर्शकों को पेड सब्सक्राइबर्स में बदलते हैं और क्या बिना बंडलिंग के वे मुनाफा कमा पाएंगे।
