2026 का आउटलुक: डील्स बढ़ेंगी, पर फोकस बदलेगा
साल 2026 में भारतीय मीडिया और मनोरंजन (M&E) सेक्टर में मर्जर और अधिग्रहण (M&A) का माहौल काफी व्यस्त रहने वाला है। इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का मानना है कि डील फ्लो तेज होगा। कंटेंट, गेमिंग, स्पोर्ट्स और AI जैसे क्षेत्रों में मजबूत इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) वाली कंपनियों पर फोकस बढ़ेगा। यह इंडस्ट्री के इनोवेशन पर जोर देने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। खुद M&E मार्केट 2.86 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें 2025 से 9% की सालाना ग्रोथ रेट होगी। 2025 में डिजिटल मीडिया 1 ट्रिलियन रुपये का आंकड़ा पार कर सबसे बड़ा सेगमेंट बन गया, जिसका श्रेय डिजिटल एडवरटाइजिंग और सब्सक्रिप्शन में दमदार ग्रोथ को जाता है।
डील वैल्यू गिरी, पर संख्या बढ़ी
हालांकि, डील्स की संख्या बढ़ने के बावजूद 2025 में डील की कुल वैल्यू में भारी गिरावट आई है। EY की M&E रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के 97 सौदों की तुलना में 2025 में 8% की बढ़ोतरी के साथ 105 ट्रांजैक्शंस हुए। वहीं, कुल डील वैल्यू 86,700 करोड़ रुपये से गिरकर 20,700 करोड़ रुपये पर आ गई, जो 76% की बड़ी गिरावट है। इस गिरावट का मुख्य कारण 2024 के Star India और Viacom18 जैसे बड़े सौदों का न होना था, जिनकी वैल्यू अकेले 8.5 बिलियन डॉलर थी। इस सौदे को छोड़ दें तो, असल डील वैल्यू 2024 के समायोजित आंकड़े से 27% बढ़ी है, जो बड़े कंसॉलिडेटेड सौदों के बजाय छोटे, मैनेजेबल अधिग्रहणों को तरजीह देने का संकेत देता है।
Sony-Zee डील का फेल होना, एक बड़ी वजह
छोटे और मध्यम आकार के सौदों (खासकर 100-500 करोड़ रुपये के बीच) का चलन बढ़ा है, जिनकी संख्या 2025 में दोगुनी से ज्यादा हो गई। यह स्केलेबल एसेट्स की बढ़ती संख्या को दर्शाता है। लेकिन, बड़े सौदों के अटकने की संभावना एक चिंता बनी हुई है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण Sony Pictures Networks India और Zee Entertainment Enterprises Ltd. (ZEEL) के बीच 10 बिलियन डॉलर का फेल हुआ मर्जर है। यह बड़ा सौदा 2024 की शुरुआत में कंप्लायंस (compliance) के मुद्दे, नेतृत्व में टकराव और रेगुलेटरी चिंताओं के कारण टूट गया।
ZEEL पर असर और वैल्यूएशन
इस डील के टूटने से Zee Entertainment को भारी नुकसान हुआ। 23 जनवरी, 2024 को शेयर में करीब 33% की गिरावट आई और मार्केट वैल्यू में 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। ब्रोकरेज फर्मों ने तुरंत स्टॉक को डाउनग्रेड कर दिया। CLSA ने अनुमान लगाया कि ZEEL का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो वापस मर्जर-पूर्व स्तरों पर आ सकता है। अप्रैल 2026 तक, Zee Entertainment Enterprises Ltd. (ZEEL) का P/E रेशियो 12.5x से 14.1x के बीच है, और मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 7,675 करोड़ रुपये है। शेयर में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है, पिछले साल यह 68 रुपये से 151.70 रुपये के बीच रहा। पिछले 12 महीनों में ZEEL के शेयरों में करीब 23.69% की गिरावट आई है।
आगे की चुनौतियां: रेगुलेशन और कंपटीशन
2026 में और ज्यादा डील्स की उम्मीद के बावजूद, मीडिया और मनोरंजन सेक्टर को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 2025 में डील वैल्यू में गिरावट यह बताती है कि मर्जर के जरिए इकोनॉमी ऑफ स्केल (economies of scale) हासिल करना मुश्किल हो सकता है। Sony-Zee मर्जर की लंबी कशमकश और विफलता रेगुलेटरी और लीडरशिप रिस्क को उजागर करती है। SEBI (Securities and Exchange Board of India) के Zee के नेतृत्व द्वारा कथित फंड डायवर्जन को लेकर पहले के मुद्दे, जिन पर Zee ने विवाद किया है, ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) की चिंताएं खड़ी की थीं, जिन्हें Sony ने भी उठाया था। इसके अलावा, Reliance और Disney Star के संभावित मर्जर जैसी बढ़ती प्रतिस्पर्धा ZEEL जैसी कंपनियों पर दबाव डाल रही है।
भविष्य की राह: एनालिस्ट्स की राय
भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग के लिए ग्रोथ का अनुमान जारी है, 2028 तक मार्केट के 3.3 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। डिजिटल मीडिया इस विस्तार को आगे बढ़ाएगा। हालांकि, बाजार में काफी संभावनाएं हैं, स्थापित कंपनियां व्यापक कंसॉलिडेशन के बजाय विशेष IP और कंटेंट एसेट्स के स्ट्रेटेजिक अधिग्रहणों पर ध्यान केंद्रित करेंगी। एनालिस्ट्स Zee Entertainment के लिए 'Buy' रेटिंग बनाए हुए हैं, जिनका औसत 12 महीने का प्राइस टारगेट 105 रुपये है, जो संभावित लाभ का संकेत देता है। हालांकि, एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय और जारी प्रतिस्पर्धी व रेगुलेटरी मुद्दे निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह देते हैं। सफलता ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) और वैल्यू बनाने के लिए सावधानीपूर्वक पोस्ट-मर्जर इंटीग्रेशन (post-merger integration) पर निर्भर करेगी।