भारत का क्रिएटर इकोसिस्टम अब एक बड़ी आर्थिक ताकत बन चुका है। साल 2025 में इसने देश की GDP में **₹18,000 करोड़** का योगदान दिया है और **10 लाख** लोगों को रोजगार दिया है।
भारत में क्रिएटर इकोसिस्टम अब केवल एक शौक नहीं रहा, बल्कि यह एक व्यवस्थित इंडस्ट्री में तब्दील हो चुका है। CII बिग पिक्चर समिट में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस सेक्टर ने देश की GDP में ₹18,000 करोड़ से ज्यादा का योगदान दिया है। यह बदलाव इतना बड़ा है कि अब कंटेंट क्रिएटर्स प्रोफेशनल मीडिया एंटरप्राइजेज की तरह काम कर रहे हैं।
विज्ञापन जगत में बड़ा बदलाव
इस प्रोफेशनल बदलाव का सीधा असर ब्रांड्स की विज्ञापन बजट प्लानिंग पर पड़ रहा है। अब कंपनियां पारंपरिक मीडिया के बजाय उन डिजिटल क्रिएटर्स की ओर रुख कर रही हैं, जिनकी पहुंच सीधे और एंगेज्ड ऑडियंस तक है। अब ये क्रिएटर्स अकेले काम नहीं कर रहे, बल्कि पूरी-पूरी स्टूडियो टीमें चला रहे हैं, जो स्थापित प्रोडक्शन हाउस को सीधी टक्कर दे रही हैं।
AI का बूस्टर डोज
इस ग्रोथ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक बड़े गेम-चेंजर के रूप में उभरा है। डेटा बताता है कि AI टूल्स की मदद से क्रिएटिव प्रोफेशनल्स की प्रोडक्टिविटी में 20% का उछाल आया है। इससे न केवल काम की गुणवत्ता बेहतर हुई है, बल्कि लागत भी कम हुई है।
भविष्य की संभावनाएं और रिस्क
आने वाले समय में यह सेक्टर GDP में ₹75,000 करोड़ तक का योगदान दे सकता है और करीब 3.6 लाख नई नौकरियां पैदा कर सकता है। हालांकि, निवेशकों को एक बड़े रिस्क यानी 'प्लेटफॉर्म डिपेंडेंस' पर नजर रखनी होगी। अधिकांश क्रिएटर्स रेवेन्यू और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए चंद ग्लोबल टेक दिग्गजों पर निर्भर हैं। ऐसे में कंटेंट रेगुलेशन और रेवेन्यू शेयरिंग की भविष्य की नीतियां इस सेक्टर के भविष्य को तय करेंगी।
