भारत अब अपने मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। **$3.3 ट्रिलियन** के ग्लोबल मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी पाने के लिए सरकार ने नेशनल AVGC-XR मिशन शुरू किया है, जिसके तहत स्किल डेवलपमेंट के लिए **₹250 करोड़** का बजट आवंटित किया गया है।
भारत का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब फोकस सिर्फ विजुअल इफेक्ट्स आउटसोर्सिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि देश को ओरिजिनल कंटेंट प्रोडक्शन का ग्लोबल हब बनाने की तैयारी है। नेशनल AVGC-XR मिशन के जरिए एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी इंडस्ट्री को एक नई दिशा दी जा रही है। वर्तमान में इस ग्लोबल मार्केट में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 1.3% है, जिसे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
स्किल डेवलपमेंट और कंटेंट लैब्स
सरकार ने यूनियन बजट में ₹250 करोड़ का फंड रखा है। इसका मुख्य उद्देश्य हजारों स्कूलों और कॉलेजों में 'कंटेंट क्रिएटर लैब्स' बनाना है। इससे तकनीकी ट्रेनिंग और रचनात्मकता के बीच का फासला कम होगा ताकि भारत सिर्फ बैक-ऑफिस काम ही न करे, बल्कि अपनी 'इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी' (IP) भी तैयार कर सके।
मीडिया कैपेबिलिटी सेंटर्स (MCC) का बढ़ता रोल
अब सर्विस हब से आगे बढ़कर 'मीडिया कैपेबिलिटी सेंटर्स' विकसित किए जा रहे हैं। ये सेंटर्स एनालिटिक्स, लोकलाइजेशन और हाई-एंड एडवर्टाइजिंग पर काम कर रहे हैं। AI-इनेबल्ड टूल्स को अपनाकर भारतीय प्रोडक्शन हाउस ग्लोबल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स की डिमांड को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि यह प्लान काफी महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। वर्ल्ड-क्लास IP तैयार करना एक कैपिटल-इंटेंसिव प्रोसेस है, जिसमें सर्विस मॉडल की तुलना में ज्यादा अनिश्चितता होती है। इसके अलावा, दक्षिण-पूर्व एशिया (Southeast Asia) के अन्य कम लागत वाले हब से कड़ी प्रतिस्पर्धा भी बनी हुई है। निवेशकों को आने वाले समय में यह देखना होगा कि कंपनियां अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखते हुए इस वैल्यू चेन में कितनी मजबूती से ऊपर आती हैं।
