डिजिटल का जलवा: AdEx में सबसे बड़ी ताकत
इस साल भारत के AdEx (Advertising Expenditure) में आई 8.3% की तेज़ रफ़्तार के पीछे मुख्य वजह रहा डिजिटल एडवरटाइजिंग का दबदबा। Dentsu की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल विज्ञापन का बाजार 19% बढ़कर ₹71,621 करोड़ पर पहुँच गया है। इसके साथ ही, डिजिटल ने कुल विज्ञापन खर्च का 59% हिस्सा अपने नाम कर लिया है, जो कि अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन वीडियो कंटेंट और खासकर रिटेल मीडिया सेगमेंट की ज़बरदस्त ग्रोथ ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। ई-रिटेल एडवरटाइजिंग ने तो कमाल ही कर दिया, जिसमें 55% से अधिक की बम्पर ग्रोथ देखी गई और यह ₹17,601 करोड़ तक पहुँच गया। उम्मीद है कि 2027 तक डिजिटल एडवरटाइजिंग का यह दबदबा और बढ़ेगा और यह ₹98,034 करोड़ तक पहुँच कर कुल AdEx का 70% हो जाएगा।
ट्रेडिशनल मीडिया पर डिजिटल का साया
जहां एक ओर डिजिटल मीडिया तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं ट्रेडिशनल मीडिया, जैसे टेलीविज़न और प्रिंट, अपनी हिस्सेदारी खो रहे हैं। टेलीविजन अभी भी 21% शेयर के साथ ₹25,964 करोड़ के विज्ञापन खर्च का माध्यम है, लेकिन 2027 तक इसका शेयर घटकर 15% होने का अनुमान है। प्रिंट मीडिया 14% शेयर ( ₹16,594 करोड़ ) पर है और इसके भी 2027 तक 10% तक सिमट जाने की आशंका है। हालांकि, आउट-ऑफ-होम (OOH) एडवरटाइजिंग ही एकमात्र ट्रेडिशनल माध्यम है जिसके 3% CAGR से बढ़ने की उम्मीद है।
विज्ञापनदाताओं का भरोसा किस पर?
विज्ञापन खर्च के मामले में, फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कंपनियां सबसे आगे रहीं। इन्होंने कुल AdEx का 30% यानी ₹36,084 करोड़ खर्च किए। ई-कॉमर्स सेक्टर दूसरे नंबर पर रहा, जिसने 18% का शेयर ( ₹22,132 करोड़ ) हासिल किया और 40.8% की सबसे तेज़ ग्रोथ भी दर्ज की। ऑटोमोटिव सेक्टर 7% शेयर ( ₹7,821 करोड़ ) के साथ तीसरे प्रमुख खर्च करने वाले क्षेत्र के रूप में उभरा।
इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव
पिछले एक दशक में विज्ञापन के परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। 2016 में जहां डिजिटल एडवरटाइजिंग का हिस्सा सिर्फ 12% था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 59% हो गया है। Dentsu South Asia के CEO, Harsha Razdan ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “एक दशक पहले डिजिटल विज्ञापन की बात केवल एक किनारे पर होती थी, पर आज यह बिज़नेस, मीडिया और कम्युनिकेशन स्ट्रैटिजी का एक मुख्य स्तंभ बन गया है।” उनका मानना है कि भविष्य में ग्रोथ असली समस्याओं को सुलझाने और टेक्नोलॉजी, कल्चर व कॉमर्स के मेलजोल पर निर्भर करेगी। इंडस्ट्री अब डेटा-संचालित, ऑटोमेटेड और कॉमर्स-एकीकृत विज्ञापन इकोसिस्टम की ओर तेज़ी से बढ़ रही है।