PE फंड्स की भारी दिलचस्पी और वैल्यूएशन का खेल
KKR, Blackstone, Carlyle और Partners Group जैसी ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी (PE) फर्म्स के बीच IPL फ्रेंचाइजी में हिस्सेदारी खरीदने की होड़ लगी है। इसकी सबसे बड़ी वजह CVC Capital Partners की शानदार सफलता है, जिसने गुजरात टाइटन्स में अपनी मेजॉरिटी स्टेक को सिर्फ चार साल में 350% से ज्यादा के मुनाफे पर बेच दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, IPL का कुल बिज़नेस वैल्यूएशन अब 18.5 अरब डॉलर के पार निकल गया है। यह वैल्यूएशन इसे दुनिया की दूसरी सबसे महंगी स्पोर्ट्स लीग बनाता है, भले ही यह NFL से पीछे हो।
खास फ्रेंचाइजी पर भी बड़ी बोली लग रही है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 1.5 अरब से 2 अरब डॉलर के बीच वैल्यू किया जा रहा है, जबकि राजस्थान रॉयल्स (RR) की बिक्री 1.1 अरब से 1.4 अरब डॉलर में होने की उम्मीद है। यह उस कीमत से कहीं ज्यादा है जिस पर ये फ्रेंचाइजी मूल रूप से खरीदी गई थीं।
IPL में फ्रेंचाइजी की संख्या सिर्फ दस है, जो इसे NFL की 32 फ्रेंचाइजी की तुलना में और भी दुर्लभ (scarcity) और आकर्षक बनाती है।
IPL की मजबूत फाइनेंशियल नींव
IPL की यह धूम धड़ाका सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि इसके मजबूत फाइनेंशियल मॉडल के कारण है। लीग का रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल कमाल का है, जिसमें मीडिया राइट्स और स्पॉन्सरशिप से होने वाली कमाई का आधा हिस्सा सभी दस टीमों में बराबर बांटा जाता है। इससे हर टीम को हर साल 5.5 करोड़ डॉलर (लगभग ₹450 करोड़) की पक्की आमदनी होती है, जो टीम की अपनी कमाई को छोड़कर है।
2022 में ब्रॉडकास्ट राइट्स की वैल्यू 6 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई थी, और अब JioStar के हाथ में इन राइट्स का कंसॉलिडेशन होने से यह आमदनी और मजबूत हो गई है।
खास बात यह है कि IPL में PE ओनरशिप पर दूसरे लीग्स (जैसे NBA) की तुलना में कम प्रतिबंध हैं, जिससे ये फर्म्स आसानी से पैसा लगा सकती हैं और स्ट्रेटेजी बना सकती हैं।
चिंताएं और जोखिम भी हैं
लेकिन हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि RCB जैसी फ्रेंचाइजी का वैल्यूएशन उनकी ब्रांड वैल्यू से काफी ज्यादा है, जो एक बबल का संकेत हो सकता है। 2027 के बाद ब्रॉडकास्ट राइट्स की नीलामी में Disney और Reliance के मर्जर के चलते कम कॉम्पिटिशन की आशंका है, जो रेवेन्यू ग्रोथ को रोक सकता है।
इसके अलावा, ग्लोबल टेंशन और मेगा-ऑक्शन को लेकर अनिश्चितता ने IPL इकोसिस्टम के वैल्यूएशन को 20% तक गिरा दिया है। टीमों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा (75-80%) सेंट्रल रेवेन्यू पर निर्भर है, जो एक तरह का कंसंट्रेशन रिस्क है। प्लेयर्स का बिज़ी कैलेंडर भी एक फैक्टर है।
आगे का रास्ता: और बढ़ेगा दबदबा
भविष्य की बात करें तो IPL का वैल्यूएशन अगले दो दशकों में 50 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। अब यह सिर्फ 'पैशन प्रोजेक्ट' नहीं रहा, बल्कि बड़े इंस्टीट्यूशनल फंड्स के लिए रिटर्न कमाने का एक जरिया बन गया है। गुजरात टाइटन्स की सफलता और RCB व RR की बिक्री से यह साफ है कि IPL एक मैच्योर 'एसेट क्लास' के तौर पर उभर रहा है, जो भारतीय खेल में बड़े निवेश को आकर्षित करेगा।