हाइब्रिड व्यूअरशिप बढ़ी, पारंपरिक टीवी पीछे छूटा
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में फैंस के कंटेंट देखने के तरीके में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हैंसा रिसर्च ग्रुप (Hansa Research Group) की एक स्टडी के मुताबिक, लगभग 70% दर्शक अब ट्रेडिशनल टेलीविजन और डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म दोनों पर मैच देख रहे हैं। यह उन लोगों से काफी अलग है जो सिर्फ टीवी पर मैच देखते थे, जिसकी संख्या घटकर केवल 18.98% रह गई है। अब व्यूअर्स ओवर-द-टॉप (OTT) सर्विसेज का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें 38.26% दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, और 31.16% ऐसे हैं जो मुख्य रूप से स्ट्रीमिंग करते हैं और कभी-कभी टीवी पर भी देखते हैं। यह बदलाव मीडिया के इस्तेमाल की बदलती आदतों को दिखाता है।
लाइव मैचों के अलावा भी कंटेंट की बढ़ती मांग
IPL का प्रभाव सिर्फ लाइव प्रसारण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी दर्शक कंटेंट से जुड़ रहे हैं। खास बात यह है कि 8.4% दर्शक YouTube पर मैच हाइलाइट्स देख रहे हैं, और 13.44% दर्शक सोशल मीडिया पर IPL क्लिप्स और रील्स देख रहे हैं। यह ट्रेंड शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट की तरफ बढ़ते रुझान को दर्शाता है, जो लोगों का ध्यान खींचने में काफी असरदार साबित हो रहा है, खासकर युवा वर्ग में। TikTok और Instagram Reels जैसे प्लेटफॉर्म्स स्पोर्ट्स कंटेंट के लिए अहम बन गए हैं और अक्सर दर्शकों को प्रीमियम कंटेंट तक ले जाते हैं। डिजिटल लाइव स्पोर्ट्स ऑडियंस में मजबूत वृद्धि की उम्मीद है, जो कुल दर्शक संख्या में बढ़त से कहीं ज्यादा है।
व्यूअरशिप में बदलाव के कारण
हैंसा रिसर्च ग्रुप के प्रमोद पवार के अनुसार, खासकर कोर मेल ऑडियंस के बीच, सिर्फ टीवी पर देखने वालों की संख्या में गिरावट के कई कारण हैं। इनमें टूर्नामेंट के लंबे फॉर्मेट के कारण होने वाली थकान और अन्य बड़े क्रिकेट इवेंट्स के साथ इसका ओवरलैप शामिल है। इसके अलावा, युवा, शहरी दर्शकों का मोबाइल स्ट्रीमिंग की ओर बढ़ना और हाइलाइट-केंद्रित कंटेंट को प्राथमिकता देना एक बड़ा कारण है। पिच का बल्लेबाजों के अनुकूल होना और मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) व चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) जैसी लोकप्रिय फ्रेंचाइजी का उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाना भी कैजुअल व्यूअरशिप पर असर डाल सकता है। इन बदलावों के बावजूद, 2026 तक IPL की कुल यूनिक व्यूअरशिप 700 मिलियन से अधिक होने की उम्मीद है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का बड़ा हिस्सा होगा।
विज्ञापन की दुनिया भी बदलती खपत के पैटर्न के अनुसार ढल रही है
दर्शकों के बदलते परिदृश्य में विज्ञापनदाताओं के लिए चुनौतियां और अवसर दोनों हैं। IPL 2026 के लिए कुल विज्ञापन खर्च ₹7,000 करोड़ से अधिक होने की उम्मीद है, जिसमें डिजिटल विज्ञापन खर्च लगभग ₹4,400 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, विज्ञापनों की कंज्यूमर रिकॉल (याद रखना) एक चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मीडिया लेनदेन पर ध्यान देने के बजाय, कहानी कहने और भावनात्मक जुड़ाव पर जोर देने की जरूरत है। कनेक्टेड टीवी (CTV) मोबाइल की तुलना में बेहतर ऐड रिकॉल प्रदान करता है, लेकिन कई ब्रांड अभी भी मोबाइल-फर्स्ट फॉर्मेट्स के लिए ऑप्टिमाइज़ कर रहे हैं। डिजिटल और छोटे कंटेंट फॉर्मेट्स की ओर बदलाव के लिए चुस्त, मोबाइल-फर्स्ट और पर्सनलाइज्ड विज्ञापन रणनीतियों की आवश्यकता है। ब्रांड बढ़ते ROI के लिए माइक्रो-मोमेंट्स और इन्फ्लुएंसर सहयोग का लाभ उठा रहे हैं। हैंसा रिसर्च ने डिजिटल विज्ञापन के प्रभाव को मापने के लिए नई सेवाएं शुरू की हैं, जिससे ब्रांडों को ऐड रिकॉल, मैसेज कम्प्रिहेंशन और उपभोक्ता देखने के व्यवहार में अंतर्दृष्टि मिलती है। यह स्वीकार करना होगा कि 78% दर्शक प्लेबैक के दौरान विज्ञापन छोड़ देते हैं।
