इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का बिजनेस वैल्यूएशन **11.4%** बढ़कर **$20.6 बिलियन** हो गया है। रिकॉर्ड फ्रेंचाइजी डील्स और डिजिटल व्यूअरशिप में बड़े बदलावों के कारण यह ग्रोथ देखी गई है। Royal Challengers Bengaluru (RCB) **$312 मिलियन** के वैल्यूएशन के साथ सबसे महंगी फ्रेंचाइजी बन गई है।
IPL का वैल्यूएशन क्यों बढ़ा?
IPL का कुल बिजनेस वैल्यूएशन $20.6 बिलियन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 11.4% ज्यादा है। लीग की स्टैंडअलोन ब्रांड वैल्यू में भी बढ़ोतरी हुई है, जो अब $4.3 बिलियन है। यह 2025 के बाद $1.1 बिलियन से ज्यादा का इजाफा है। प्रति मैच वैल्यूएशन के मामले में IPL अब सिर्फ नेशनल फुटबॉल लीग (NFL) से पीछे है, जो मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में इसकी धाक जमाता है।
ऐतिहासिक फ्रेंचाइजी सौदे
IPL में अब बड़े कॉरपोरेट हाउसेज का मालिकाना हक देखने को मिल रहा है। Royal Challengers Bengaluru (RCB) ने IPL के इतिहास में सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी डील की है, जिसे $1.78 बिलियन में एक कंसोर्टियम ने खरीदा है। इस कंसोर्टियम में Blackstone, Bolt Ventures, Aditya Birla Group और Times of India Group शामिल हैं। Rajasthan Royals की टीम भी $1.65 बिलियन में बिकी है, जिसे Mittal परिवार और Adar Poonawalla ने खरीदा है। ये सौदे IPL के रेवेन्यू मॉडल और लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल पर ग्लोबल इन्वेस्टर्स का भरोसा दिखाते हैं।
फ्रेंचाइजी की वैल्यूएशन रैंकिंग
Royal Challengers Bengaluru (RCB) $312 मिलियन के ब्रांड वैल्यू के साथ सबसे महंगी फ्रेंचाइजी बन गई है। यह पहली बार है जब किसी IPL टीम का वैल्यूएशन $300 मिलियन के पार गया है। Mumbai Indians $264 मिलियन के वैल्यूएशन के साथ दूसरे नंबर पर है। Kolkata Knight Riders और Chennai Super Kings की वैल्यूएशन क्रमशः $245 मिलियन और $244 मिलियन है। Sunrisers Hyderabad $168 मिलियन और Rajasthan Royals $161 मिलियन के वैल्यूएशन के साथ टॉप फ्रेंचाइजी में शामिल हैं।
डिजिटल व्यूअरशिप और कमर्शियल ट्रेंड्स
IPL की यह फाइनेंशियल ग्रोथ कंटेंट देखने के तरीकों में बड़े बदलाव के साथ हो रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यूअरशिप रिकॉर्ड तोड़ रही है, जबकि टीवी पर दर्शक कम हो रहे हैं। इस बदलाव से नए मोनेटाइजेशन के तरीके सामने आ रहे हैं, जैसे Google Gemini के साथ हुआ डेटा-फोक्स्ड पार्टनरशिप। लीग का कुल रेवेन्यू $1.8 बिलियन से ज्यादा हो गया है। अब फोकस इन हाई वैल्यूएशन्स को बनाए रखने और डिजिटल-फर्स्ट स्ट्रैटेजी के जरिए प्रॉफिटेबिलिटी पर रहेगा। इन्वेस्टर्स देखेंगे कि कैसे फ्रेंचाइजी डिजिटल रेवेन्यू को मैनेज करती हैं और क्या नए मालिक ऑन-फील्ड परफॉर्मेंस और कमर्शियल रीच में सुधार ला पाते हैं।
