इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) ने TRAI से FAST और ALTD स्ट्रीमिंग सेवाओं के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग से बचने का आग्रह किया है। उद्योग निकाय का मानना है कि ऐसे नियम अनुपालन लागत बढ़ा सकते हैं और डिजिटल नवाचार को धीमा कर सकते हैं। निवेशक इस नियामक बहस पर नज़र रख सकते हैं क्योंकि यह सीधे तौर पर भारत में ऑनलाइन मनोरंजन प्लेटफॉर्म के विकास और संचालन मॉडल को प्रभावित करती है।
नियामक बहस: लाइसेंसिंग का मुद्दा
इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के परामर्श पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए, फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविज़न (FAST) और एप्लीकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविज़न डिस्ट्रिब्यूशन (ALTD) सेवाओं के लिए लाइसेंसिंग ढांचे की शुरुआत का विरोध किया है। IAMAI का तर्क है कि ये प्लेटफॉर्म ओपन इंटरनेट पर काम करते हैं, जो उन्हें पारंपरिक प्रसारण सेवाओं से अलग करता है।
उद्योग की चिंताएं और कानूनी पहलू
IAMAI का कहना है कि FAST और ALTD प्लेटफॉर्म एप्लिकेशन लेयर पर काम करते हैं और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा प्रदान किए गए मौजूदा इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाते हैं। ऐसे में, प्रसारण-शैली की लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को लागू करने से छोटे स्ट्रीमिंग प्रोवाइडर्स पर अनुपालन का बोझ बढ़ सकता है और उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध सामग्री की विविधता सीमित हो सकती है। IAMAI ने यह भी बताया कि टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट 2023 में ओवर-द-टॉप (OTT) सेवाओं को नियामक दायरे से बाहर रखा गया था, और इस कदम से संसद की मंशा के विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। वर्तमान में, ऑनलाइन सामग्री प्रदाता इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, और मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 द्वारा शासित होते हैं।
निवेशकों के लिए मायने
इस परामर्श प्रक्रिया का परिणाम निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। एक सख्त लाइसेंसिंग व्यवस्था की ओर बढ़ने से डिजिटल मीडिया कंपनियों के लिए पूंजी और परिचालन व्यय बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर लाभ मार्जिन पर पड़ सकता है। उद्योग नियामक सहजता (regulatory forbearance) के एक ऐसे मार्ग की वकालत कर रहा है जहाँ अनुपालन को आसान बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाए, न कि प्रवेश के लिए नई बाधाएँ खड़ी की जाएँ। TRAI हितधारकों की प्रतिक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है, और बाज़ार पर्यवेक्षक यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि अंतिम ढांचा मौजूदा आईटी अधिनियम के अनुरूप होगा या डिजिटल मनोरंजन क्षेत्र के लिए एक नया और अधिक जटिल नियम पेश करेगा।
