Google और Perplexity AI अब जर्मनी में 'मीडिया कंटेंट प्रोवाइडर' की श्रेणी में, बढ़ी मुश्किलें

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Google और Perplexity AI अब जर्मनी में 'मीडिया कंटेंट प्रोवाइडर' की श्रेणी में, बढ़ी मुश्किलें

जर्मनी के मीडिया रेगुलेटर ने Google AI Overviews और Perplexity AI को राष्ट्रीय मीडिया कानूनों का पालन करने का आदेश दिया है। इससे ये कंपनियां अब सिर्फ सर्च टूल नहीं, बल्कि कंटेंट क्रिएटर मानी जाएंगी, जिससे उनकी कानूनी ज़िम्मेदारी और रेगुलेटरी निगरानी बढ़ सकती है।

बड़ी कार्रवाई: Google और Perplexity AI पर कसेगा शिकंजा

जर्मनी की लाइसेंसिंग और निगरानी आयोग (ZAK) ने अब बड़ा AI प्लेटफॉर्म्स को देश के मीडिया कानूनों के दायरे में ला दिया है। इस फैसले के तहत Google AI Overviews और Perplexity AI जैसी सेवाएं अब यूरोपियन मार्केट में रेगुलेशन के नए नियमों के तहत आएंगी। AI द्वारा जेनरेट किए गए समरी को अब प्रोवाइडर-निर्मित कंटेंट माना जा रहा है, जिससे इन प्लेटफॉर्म्स को अक्सर मिलने वाली कानूनी सुरक्षा खत्म हो गई है।

क्या है कानूनी बदलाव का असर?

रेगुलेटर का तर्क है कि जब कोई AI समाचारों का सारांश (Summary) बनाता है या किसी सवाल का जवाब देता है, तो वह एक पैसिव इंटरमीडियरी (Passive Intermediary) की तरह नहीं, बल्कि एक पब्लिशर (Publisher) की तरह काम करता है। यह बड़ा अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (Digital Services Act) के तहत मिलने वाली लायबिलिटी छूट (Liability Exemptions) पर निर्भरता को सीमित करता है। नए नियमों के अनुसार, यदि AI गलत या हानिकारक कंटेंट जेनरेट करता है, तो प्रोवाइडर सीधे तौर पर जिम्मेदार हो सकता है। ऐसा ही एक मामला पहले म्यूनिख कोर्ट में Google की सर्च सुविधाओं में हुई गलतियों को लेकर भी सामने आया था।

मार्केट डोमिनेंस और मीडिया की चिंता

कानूनी ज़िम्मेदारी के अलावा, जर्मन रेगुलेटर को इस बात की भी चिंता है कि AI सेवाएं यूजर ट्रैफिक को कैसे प्रभावित करती हैं। ZAK ने बताया कि Google AI Overviews जैसी सुविधाएं, जो सर्च रिजल्ट्स में सबसे ऊपर दिखाई देती हैं, अक्सर पारंपरिक वेबसाइट लिंक्स को नीचे धकेल देती हैं। इससे इंडिपेंडेंट न्यूज आउटलेट्स और मीडिया पब्लिशर्स का ट्रैफिक काफी कम हो सकता है। इसी तरह, Perplexity जैसे चैटबॉट भी जांच के दायरे में हैं कि वे किन सोर्स को हाइलाइट करते हैं। रेगुलेटर यह जांच कर रहा है कि क्या ये सेवाएं मीडिया इंटरमीडियरी के तौर पर काम करती हैं, जिसके चलते उन्हें भविष्य में सख्त नियमों का पालन करना पड़ सकता है ताकि एक विविध और निष्पक्ष मीडिया वातावरण बना रहे।

AI प्लेटफॉर्म्स के लिए अगला कदम

हालांकि इस फैसले से रेगुलेटरी बोझ बढ़ गया है, लेकिन यह सेवाओं को बंद करने का अंतिम आदेश नहीं है। Google और Perplexity के पास कानूनी सिस्टम के माध्यम से इस वर्गीकरण को चुनौती देने का अधिकार है। Perplexity ने मौजूदा EU प्राइवेसी स्टैंडर्ड्स और डेटा सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। अब यह देखना होगा कि ये कंपनियां पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अपने सर्च एल्गोरिदम (Search Algorithms) में बदलाव करती हैं या फिर ZAK के फैसले को कोर्ट में चुनौती देती हैं। इसका परिणाम यह हो सकता है कि आने वाले वर्षों में अन्य यूरोपीय देश AI-जेनरेटेड समाचार सामग्री और प्लेटफॉर्म की लायबिलिटी को कैसे संभालते हैं, इसके लिए एक मिसाल कायम हो।

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