जून 2026 से BARC रेटिंग्स सस्पेंड होने के बाद, GTPL Hathway ने दर्शकों की पसंद समझने के लिए अपने सेट-टॉप बॉक्स (STB) डेटा का उपयोग करना शुरू कर दिया है। हालांकि, यह कदम पारंपरिक रेटिंग सिस्टम का विकल्प बनने में अभी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
RPD एनालिटिक्स की ओर बदलाव
जून 2026 में आधिकारिक Broadcast Audience Research Council (BARC) रेटिंग्स पर रोक लगने के बाद भारतीय मीडिया मापन में एक बड़ा खालीपन आ गया है। इस कमी को पूरा करने के लिए अब केबल और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म 'रिटर्न-पाथ-डेटा' (RPD) का सहारा ले रहे हैं। GTPL Hathway इस बदलाव में सबसे आगे दिख रही है, जो अपने नेटवर्क से सीधे व्यूअरशिप डेटा जुटाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट चला रही है।
इस पहल को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए कंपनी TAM India के साथ मिलकर काम कर रही है। वर्तमान में 10,000 सेट-टॉप बॉक्स से शुरू हुआ यह दायरा 50,000 बॉक्स तक ले जाने की योजना है। पारंपरिक पैनल-आधारित मापन (People-meters) के उलट, RPD हर कनेक्टेड डिवाइस से रियल-टाइम डेटा कैप्चर करता है, जो अधिक व्यापक जानकारी देता है।
क्या हैं बड़ी रुकावटें?
Tata Play जैसे ऑपरेटर्स ने पहले भी कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया है, लेकिन पूरे इंडस्ट्री के लिए इसे 'गोल्ड स्टैंडर्ड' बनाना मुश्किल है। मुख्य समस्या डेटा की प्रकृति में है:
- डेमोग्राफिक जानकारी की कमी: विज्ञापनदाताओं (Advertisers) को सटीक प्राइसिंग के लिए उम्र, लिंग और आय के डेटा की जरूरत होती है, जो RPD फिलहाल नहीं दे पा रहा है।
- मानकीकरण (Standardization) का अभाव: Airtel Digital TV और DEN Networks के पिछले प्रयास भी डेटा शेयरिंग और बुनियादी ढांचे की लागत के कारण सफल नहीं हो सके।
भविष्य की राह
सूचना और प्रसारण मंत्रालय (Ministry of I&B) के 2026 के दिशानिर्देशों ने इस ओर दबाव बढ़ाया है, लेकिन अभी तक कोई साझा metodología नहीं बन पाई है। जब तक डेटा का एक स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क नहीं बनता, तब तक RPD एक नेशनल रिप्लेसमेंट बनने के बजाय केवल प्लेटफॉर्म-विशिष्ट टूल बनकर रह सकता है। निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि क्या डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स और एडवरटाइजर्स एक साझा सहमति पर पहुंच पाते हैं या नहीं।
