'होम स्क्रीन' से होगी मोटी कमाई!
AdTech कंपनी Frodoh और क्षेत्रीय स्ट्रीमिंग सर्विस Chaupal मिलकर एक नई 'फर्स्ट-स्क्रीन मोनेटाइजेशन' यानी 'पहले स्क्रीन पर कमाई' की शुरुआत कर रहे हैं। इस तरीके का मकसद सब्सक्रिप्शन वीडियो प्लेटफॉर्म्स के लिए आय के नए जरिया खोजना है। इसमें विज्ञापन कंटेंट के अंदर दिखाने के बजाय कनेक्टेड टीवी (CTV) की होम स्क्रीन और डिस्कवरी इंटरफेस पर फोकस किए जाएंगे। आइडिया यह है कि यूजर प्लेटफॉर्म के साथ कैसे जुड़ते हैं, उससे अतिरिक्त रेवेन्यू जेनरेट किया जाए, लेकिन कंटेंट देखते समय यूजर को कोई डिस्टर्बेंस न हो। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म्स को सब्सक्रिप्शन के अलावा अन्य आय स्रोतों की तलाश है, क्योंकि कंटेंट की लागत लगातार बढ़ रही है और बाजार में भीड़ बढ़ती जा रही है।
भारत में स्ट्रीमिंग का बदलता परिदृश्य
भारत के स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री के मौजूदा इकोनॉमिक्स को देखते हुए यह पार्टनरशिप काफी अहम है। कंटेंट पर होने वाला खर्च आसमान छू रहा है और सब्सक्राइबर बढ़ाने की रफ़्तार धीमी पड़ रही है। ऐसे में OTT प्रोवाइडर्स पैसे कमाने के नए तरीके खोज रहे हैं। Frodoh का मॉडल प्लेटफॉर्म की होम स्क्रीन जैसी प्राइम स्पेस का इस्तेमाल करेगा। Chaupal, जो पंजाबी, हरियाणवी और भोजपुरी में कंटेंट ऑफर करता है, इस सिस्टम से अपनी फाइनेंशियल हेल्थ सुधारने की कोशिश करेगा, साथ ही अपने यूजर्स के लिए विज्ञापन-मुक्त (Ad-free) व्यूइंग एक्सपीरियंस बनाए रखने का लक्ष्य भी रखेगा। भारत का डिजिटल एडवरटाइजिंग मार्केट तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, जिसमें सिर्फ CTV एडवरटाइजिंग अकेले ₹3,500 करोड़ तक पहुँच सकती है। ऐसे में नए इनकम मॉडल बेहद प्रासंगिक हो जाते हैं।
लीडर्स क्या कहते हैं?
Chaupal के सीईओ संदीप बंसल ने इस पार्टनरशिप को अपनी स्ट्रैटेजी का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह ऐसे समय में है जब हमें लगातार ग्रोथ चाहिए और ऑडियंस का भरोसा भी बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि 'फर्स्ट-स्क्रीन' मोनेटाइजेशन लेयर का इंटरफेस इतना स्मूथ है कि यह नैचुरली नॉन-डिसरप्टिव डिस्कवरी ऑफर करता है। वहीं, Frodoh के फाउंडर और सीईओ रुषभ आर ठक्कर ने बताया कि यह भारत में एड्स का एक नया कैटेगरी है, जो होम स्क्रीन स्पेस का उपयोग करके एड ऑपर्च्युनिटीज़ को बढ़ाता है। Frodoh, जिसकी स्थापना 2020 में हुई थी, 2023 से CTV एडवरटाइजिंग पर फोकस कर रही है और अब रिटेल मीडिया और डिजिटल आउट-ऑफ-होम (DOOH) एडवरटाइजिंग में भी कदम बढ़ा रही है।
चुनौतियाँ: यूजर का भरोसा और डेटा प्राइवेसी
हालांकि Frodoh और Chaupal इसे एक नए समाधान के तौर पर पेश कर रहे हैं, लेकिन होम स्क्रीन एडवरटाइजिंग की सफलता यूजर्स की स्वीकार्यता और विज्ञापनदाताओं के लिए अच्छे नतीजे देने पर निर्भर करेगी। Netflix और Amazon Prime Video जैसे बड़े ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स ने भी आय और यूजर एक्सपीरियंस को बैलेंस करने के लिए सस्ते ऐड-सपोर्टेड प्लान्स जैसे कई एड मॉडल्स आजमाए हैं। लेकिन, डिस्कवरी स्क्रीन पर विज्ञापन अगर इंट्रूसिव (घुसपैठिया) लगे तो यूजर्स को नाराज कर सकते हैं। भारतीय CTV एडवरटाइजिंग मार्केट 2026 तक ₹1,800 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है, और इसे JioHotstar, Zee5 और SonyLIV जैसे प्लेटफॉर्म्स से कड़ी टक्कर मिल रही है, जो हाइब्रिड ऐड-सब्सक्रिप्शन मॉडल भी एक्सप्लोर कर रहे हैं। इसके अलावा, भारत का डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act), जिसके नियम 2025 के अंत तक आने की उम्मीद है, कंसेंट और डेटा के उपयोग के लिए सख्त नियम लाएगा। यह उन ऐड-टेक प्रैक्टिसेज को जटिल बना सकता है जो यूजर बिहेवियर को ट्रैक करने पर बहुत ज्यादा निर्भर करती हैं।
भविष्य की राह: ग्रोथ और प्राइवेसी का संतुलन
Frodoh और Chaupal का यह कोलैबोरेशन डिजिटल वीडियो सेक्टर में आय की चुनौतियों से निपटने के लिए एक स्ट्रैटेजिक मूव है। जैसे-जैसे भारत का OTT मार्केट मैच्योर हो रहा है, अलग-अलग आय के स्रोत जरूरी होते जा रहे हैं। यह पार्टनरशिप रीजनल प्लेटफॉर्म्स के लिए फाइनेंशियल डाइवर्सिफिकेशन का एक पैटर्न सेट कर सकती है। हालांकि, इसकी लॉन्ग-टर्म सक्सेस इस बात पर निर्भर करेगी कि यह विज्ञापनदाताओं को नतीजे दिखाए, यूजर्स इस अप्रोच पर भरोसा करें और डिमांड बनी रहे, साथ ही प्राइवेसी नियमों का भी पालन हो। प्राइवेसी रेगुलेशंस का पालन करते हुए और नॉन-डिसरप्टिव यूजर एक्सपीरियंस बनाए रखते हुए इनोवेशन करने की क्षमता ही इन 'फर्स्ट-स्क्रीन' ऐड मॉडल्स को व्यापक रूप से अपनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
