दुनिया भर में फर्मेंटेड (खमीरयुक्त) फूड्स और बेवेरेजेस (पेय पदार्थ) का मार्केट 2025 में **$298.90 बिलियन** से बढ़कर 2031 तक **$434.60 बिलियन** पहुंचने का अनुमान है। लोगों में गट हेल्थ (आंतों के स्वास्थ्य) और पाचन संबंधी wellness की बढ़ती मांग इस ग्रोथ का मुख्य कारण है। ऐसे में, भारतीय पारंपरिक तरीके और नए स्टार्टअप्स इस ग्लोबल बूम में कैसे फिट हो रहे हैं, यह देखना दिलचस्प होगा, खासकर 'देसी कल्चर्स' जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए।
फर्मेंटेड फूड्स का बढ़ता बाज़ार
फर्मेंटेड फूड्स और बेवेरेजेस का सेक्टर अब घर-घर की पारंपरिक रेसिपी से निकलकर बड़े पैमाने पर कमर्शियल एंटरप्राइजेज की ओर बढ़ रहा है। मोर्डोर इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में $298.90 बिलियन का यह ग्लोबल मार्केट 2031 तक करीब $434.60 बिलियन तक पहुंच सकता है। इस जबरदस्त ग्रोथ की एक बड़ी वजह पाचन स्वास्थ्य (Digestive Health) के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता है, जो फूड कंपनियों को प्रोबायोटिक-युक्त प्रोडक्ट्स में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
भारतीय परंपरा का ग्लोबल बाज़ार से जुड़ाव
'देसी कल्चर्स' कॉन्फ्रेंस (18-26 जुलाई, 2026) इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे उत्तर-पूर्व, पश्चिमी हिमालय और दक्षिण भारत की पारंपरिक फर्मेंटेशन तकनीकें नए फूड प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल हो रही हैं। यह इवेंट रिसर्चर, शेफ और उद्यमियों के लिए एक मिलन बिंदु है, जो इन पारंपरिक माइक्रोबियल प्रक्रियाओं को कॉफी, कोको और ख़ास तरह के चीज़ (Cheese) जैसे प्रोडक्ट्स में लागू करना चाहते हैं।
निवेशकों के लिए, यह एक ऐसा बदलाव है जहां स्थानीय, आर्टिसनल फर्मेंटेशन अब औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहा है। स्टार्टअप्स रिसर्च-आधारित फ्लेवर प्रोफाइल का उपयोग करके प्रीमियम फूड प्रोडक्ट्स बना रहे हैं, जो भारत और विदेशों में wellness को लेकर जागरूक उपभोक्ताओं को लक्षित कर रहे हैं। कोजी-बेस्ड तकनीक या फेनी (Feni) प्रोडक्शन पर ध्यान केंद्रित करने वाले विशेष उद्यमों का उदय, पुरानी फर्मेंटेशन विधियों को प्रोफेशनल बनाने का एक सचेत प्रयास दर्शाता है।
बाज़ार की चुनौतियाँ और कामकाज की हकीकत
हालांकि इस बाज़ार में अपार संभावनाएं हैं, फर्मेंटेशन-आधारित व्यवसायों को स्केल करने में कई जटिल ऑपरेशनल जोखिम शामिल हैं। इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाली कंपनियों को प्रोडक्ट की कंसिस्टेंसी, माइक्रोबियल स्टेबिलिटी बनाए रखने और प्रीमियम कीमत को बनाए रखते हुए उत्पादन बढ़ाने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, यह इंडस्ट्री सप्लाई चेन की स्थिरता के प्रति भी संवेदनशील है, खासकर फर्मेंटेशन प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले विशेष कच्चे माल के लिए।
निवेशकों को इन उद्यमों द्वारा छोटे बैच उत्पादन से बड़े पैमाने पर वितरण तक के बदलाव पर नज़र रखनी चाहिए। इस क्षेत्र में व्यवसाय की स्थिरता गुणवत्ता नियंत्रण बनाए रखने और खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक रेगुलेटरी मानकों को पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करती है। जैसे-जैसे ये व्यवसाय ग्लोबल फूड सप्लाई चेन में एकीकृत होंगे, उन्हें बदलते उपभोक्ता रुझानों और वेलनेस स्पेस में प्रवेश करने वाले बड़े, स्थापित खाद्य और पेय निगमों से प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ेगा। उद्योग मंचों पर होने वाली आगामी चर्चाओं से यह insight मिलने की संभावना है कि ये कंपनियां पारंपरिक तरीकों को आधुनिक व्यावसायिक पैमाने और दक्षता के साथ कैसे संतुलित करने का इरादा रखती हैं।
