FIFA ने 2023-2026 के लिए रिकॉर्ड **$15 अरब** की कमाई का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य 48 टीमों वाले वर्ल्ड कप के विस्तार से संभव हुआ है, जिससे स्पॉन्सरशिप और टिकट की बिक्री बढ़ी है। हालांकि, डायनामिक प्राइसिंग और महंगे टिकटों को लेकर बहस जारी है।
Detailed Coverage
48 टीमों के वर्ल्ड कप से कमाई में उछाल
FIFA ने वर्ल्ड कप को एक बड़े कमर्शियल इवेंट के तौर पर तैयार किया है। 2023-2026 के फाइनेंशियल साइकल में $15 अरब की कमाई का टारगेट रखा गया है। यह कमाई पिछले साइकल से काफी ज्यादा है, जिसका मुख्य कारण 32 टीमों के बजाय 48 टीमों का टूर्नामेंट में शामिल होना है। इससे मैचों की कुल संख्या 64 से बढ़कर 104 हो गई है।
ज्यादा मैच, ज्यादा कमाई
48 टीमों के फॉर्मेट ने FIFA के लिए कमर्शियल मौके बढ़ा दिए हैं। ज्यादा मैचों का मतलब है टीवी राइट्स, स्पॉन्सरशिप डील और हॉस्पिटैलिटी पैकेज के लिए ज्यादा मौके। इसी वजह से FIFA ने अपनी कमाई का अनुमान $8.9 अरब से बढ़ाकर $15 अरब कर दिया है। ग्रुप स्टेज के दौरान स्टेडियम 99% तक भरे रहे, जिससे कंपनी की कमाई को और बढ़ावा मिला।
डायनामिक प्राइसिंग और फैंस पर बोझ
इस बार FIFA ने 'डायनामिक प्राइसिंग' का नया तरीका अपनाया है, जिसमें टिकट की कीमतें फैंस की मांग के हिसाब से बदलती हैं। इसके साथ ही, बेस प्राइस भी बढ़ा दिए गए हैं, जिससे 2026 का टूर्नामेंट फैंस के लिए काफी महंगा हो गया है। ग्रुप स्टेज के टिकटों की कीमत $575 तक पहुंच गई है, जो 2022 के कतर वर्ल्ड कप के $220 के मुकाबले काफी ज्यादा है। कुछ मामलों में, डायनामिक प्राइसिंग के कारण ग्रुप स्टेज के टिकट $1,000 से भी ऊपर चले गए, जबकि फाइनल जैसे मैचों के टिकट सेकेंडरी मार्केट में हजारों डॉलर में बिके।
नए कमाई के जरियों का इस्तेमाल
टिकटों के अलावा, FIFA इवेंट से जुड़े दूसरे पहलुओं से भी कमाई कर रहा है। 'हाइड्रेशन टाइमआउट' जैसे गेम ब्रेक्स में एडवरटाइजिंग पैकेज शामिल किए गए हैं, जिससे Fox Sports जैसे ब्रॉडकास्टर्स को महंगे एड स्लॉट बेचने का मौका मिला है। FIFA ने अपनी ऑफिशियल रीसेल प्लेटफॉर्म पर टिकटों की बिक्री पर 15% कमीशन फीस लागू करके सेकेंडरी मार्केट पर भी अपनी पकड़ मजबूत की है।
होस्ट शहरों पर आर्थिक असर
हालांकि FIFA ने रिकॉर्ड कमाई की है, लेकिन होस्ट शहरों के लिए इसके व्यापक आर्थिक फायदे अभी भी विश्लेषण का विषय हैं। बड़े इवेंट्स से पर्यटकों की आमद तो बढ़ती है, लेकिन जरूरी नहीं कि इससे इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हो या स्थानीय व्यवसायों को लंबे समय तक फायदा मिले। कुछ होस्ट शहरों में उम्मीद से कम होटल ऑक्यूपेंसी की खबरें इन आर्थिक फायदों के असमान वितरण को दर्शाती हैं। स्पोर्ट्स और मीडिया सेक्टर के निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि FIFA भविष्य में इस कमाई को कैसे बनाए रखता है, साथ ही फैंस के लिए बढ़ती लागत और होस्ट देशों पर पड़ने वाले दबाव को कैसे संतुलित करता है।
