📉 नतीजों पर एक गहरी नज़र
Entertainment Network (India) Limited (ENIL) के लिए बीता फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) अच्छी नहीं रही। कंपनी ने स्टैंडअलोन (Standalone) आधार पर ₹159.8 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 5.2% अधिक है। लेकिन, इस दौरान कंपनी के कुल खर्चे 14.5% बढ़कर ₹170.0 करोड़ पर पहुंच गए। नतीजतन, टैक्स और विशेष खर्चों को छोड़कर कंपनी को ₹37.3 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में ₹114.7 करोड़ का मुनाफा (Profit) था।
स्पेशल खर्चे और नेट लॉस
नई लेबर कोड्स (Labour Codes) के चलते ग्रेच्युटी (Gratuity) और लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment) के लिए ₹8.1 करोड़ का एक विशेष चार्ज (Exceptional Charge) भी कंपनी पर पड़ा। इस कारण, Q3 FY26 में स्टैंडअलोन नेट लॉस (Net Loss) बढ़कर ₹62.0 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की ₹85.0 करोड़ की प्रॉफिट की तुलना में बड़ा झटका है। प्रति शेयर आय (EPS) ₹(1.30) रही।
9 महीनों के नतीजे भी चिंताजनक
पहली नौ महीनों (Nine Months) में भी कंपनी की हालत कुछ खास नहीं रही। स्टैंडअलोन रेवेन्यू 8.3% बढ़कर ₹401.0 करोड़ हुआ, लेकिन खर्चे 12.8% बढ़कर ₹446.7 करोड़ हो गए। इससे 9 महीनों का प्री-टैक्स लॉस ₹177.5 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल ₹25.3 करोड़ का मुनाफा था। 9 महीनों का नेट लॉस बढ़कर ₹149.2 करोड़ हो गया, जो पिछले साल के ₹7.3 करोड़ के लॉस से काफी बड़ा है।
कंसॉलिडेटेड नतीजे भी मिले-जुले
कंसॉलिडेटेड (Consolidated) आधार पर भी तस्वीर एक जैसी ही दिखी। Q3 FY26 में रेवेन्यू 3.8% बढ़कर ₹164.9 करोड़ हुआ, लेकिन खर्चे 14.5% बढ़कर ₹175.3 करोड़ हो गए। कंसॉलिडेटेड नेट लॉस ₹63.0 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹92.6 करोड़ के प्रॉफिट के बिल्कुल विपरीत है। 9 महीनों का कंसॉलिडेटेड नेट लॉस ₹156.6 करोड़ रहा।
आखिर घाटे की वजह क्या है?
मुख्य वजह यह है कि कंपनी के खर्चे, रेवेन्यू की ग्रोथ (Growth) से कहीं तेज़ रफ़्तार से बढ़ रहे हैं। यह ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational Cost) पर बढ़ते दबाव और शायद गिरते ऑपरेटिंग लेवरेज (Operating Leverage) का संकेत देता है।
कंपनी की अहम चालें
- एसेट ट्रांसफर: ENIL ने चार एफएम रेडियो स्टेशनों (कानपुर, लखनऊ, नागपुर, हैदराबाद) को ₹19.6 करोड़ प्लस टैक्स में बेचने का एक टर्म शीट (Term Sheet) साइन किया है। इसके लिए एडवरटाइजिंग सेल्स एग्रीमेंट (ASA) भी हो चुका है।
- प्रमोटर रीऑर्गनाइजेशन: NCLT ने प्रमोटर्स Bennett Coleman and Company Limited (BCCL) और Times Horizon Private Limited (THPL) के बीच एक स्कीम को मंजूरी दी है।
- विदेशी ऑपरेशंस का दम: Q3 FY26 में भारत के बाहर (Outside India) से रेवेन्यू ग्रोथ 17.4% रही, जो भारत के 3.1% ग्रोथ के मुकाबले काफी बेहतर है। 9 महीनों में भी विदेशी रेवेन्यू 10.4% बढ़ा, जबकि भारत में 9.6%।
🚩 रिस्क और आगे का रास्ता
कंपनी के लिए सबसे बड़े रिस्क में खर्चों का बढ़ना, एसेट बेचने की प्रक्रिया में देरी या अड़चनें, PPL के साथ चल रहा कानूनी मामला, और वापस मुनाफे में आने की अनिश्चितता शामिल हैं। आगे चलकर यह देखना होगा कि ENIL अपने ऑपरेशनल खर्चों को कितनी अच्छी तरह मैनेज कर पाती है और एसेट ट्रांसफर की प्रक्रिया कितनी सफल होती है। कंपनी की विदेश में बढ़ती ग्रोथ एक उम्मीद जगाती है, लेकिन इसका कुल कारोबार पर असर महत्वपूर्ण होगा।