Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2025 का पालन करते हुए Dream11 ने अब सभी रियल-मनी गेमिंग कॉन्टेस्ट बंद कर दिए हैं। कंपनी अब खुद को एक AI-संचालित स्पोर्ट्स एंगेजमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में बदल रही है, जिससे उसके बिजनेस मॉडल पर बड़ा असर पड़ना तय है।
बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
Dream11 ने अपने कामकाज में बड़ा फेरबदल करते हुए खुद को पूरी तरह से रियल-मनी फैंटेसी स्पोर्ट्स से अलग कर लिया है। यह फैसला 'Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2025' के चलते लिया गया है, जिसने ऑनलाइन पैसे लगाकर खेले जाने वाले गेम्स पर देशभर में बैन लगा दिया है। कानूनी पेच से बचने के लिए कंपनी ने अपने उस मुख्य प्रोडक्ट को हटा दिया है, जो इतने सालों से उनकी कमाई का इकलौता आधार था।
रेवेन्यू पर गहरा असर
कंपनी के लिए आगे की राह बेहद कठिन है, क्योंकि फैंटेसी गेमिंग से ही Dream11 की कुल कमाई का 95% हिस्सा आता था और लगभग 100% मुनाफा यहीं से मिलता था। इस बदलाव के बीच कंपनी ने अपनी फिनटेक सब्सिडियरी 'Dream Money' को भी 30 जुलाई, 2026 को बंद कर दिया है। अब कंपनी AI-क्यूरेटेड कंटेंट और लाइव स्ट्रीमिंग जैसे मॉडल्स पर दांव लगा रही है, लेकिन विश्लेषकों को संदेह है कि क्या ये नए तरीके कंपनी की $8 बिलियन की पिछली वैल्यूएशन को बरकरार रख पाएंगे।
स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को बड़ा झटका
इस नियम का असर सीधे तौर पर भारतीय खेल जगत और BCCI पर पड़ा है। Dream11 ने इंडियन क्रिकेट टीम के साथ अपनी लीड स्पॉन्सरशिप डील को भी खत्म कर दिया है, जो करीब $44 मिलियन यानी ₹358 करोड़ की थी। इस तरह के कदमों से खेल संस्थाओं के सामने फंड की भारी कमी आ गई है, जिसे भरना अगले कुछ सीजन्स के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
जोखिम और भविष्य की चुनौतियां
कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती 30 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर्स को बनाए रखने की है, जो मुख्य रूप से नकद इनाम की उम्मीद में प्लेटफॉर्म पर आते थे। बिना कैश इंसेंटिव के उन्हें कंटेंट-ओनली प्लेटफॉर्म पर रोक पाना एक अनिश्चित रणनीति है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट में अभी भी 2025 गेमिंग एक्ट के खिलाफ याचिकाएं पेंडिंग हैं, जिससे रेगुलेटरी माहौल अभी भी बना हुआ है। अब निवेशक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या कंपनी का नया मॉडल पुराने मुनाफे के स्तर तक पहुंच पाएगा या नहीं।
