₹7,203 करोड़ की मांग ने बढ़ाई Dish TV की मुश्किलें
सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने हाल ही में Dish TV India Limited को ₹7,203 करोड़ की लाइसेंस फीस चुकाने का नया आदेश दिया है। इस आदेश ने कंपनी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, क्योंकि यह राशि फाइनेंशियल ईयर 2025 के ब्याज सहित है। हालांकि MIB ने यह भी साफ किया है कि यह राशि ऑडिट के नतीजों और लंबित कानूनी मामलों के आधार पर तय की जाएगी, लेकिन कंपनी इस पूरी मांग को चुनौती दे रही है।
वित्तीय संकट गहराया, नेट वर्थ हुआ नेगेटिव
31 दिसंबर 2025 तक, कंपनी पर ₹4,804 करोड़ का ब्याज चढ़ चुका था, जो छह महीने पहले ₹4,613 करोड़ था। यह लगातार बढ़ती देनदारी को दर्शाता है। इस भारी बोझ के कारण, कंपनी का नेट वर्थ (Net Worth) नकारात्मक हो गया है, यानी कंपनी के कुल नुकसान उसके शेयर कैपिटल से कहीं ज्यादा हो गए हैं। यह वित्तीय संकट का एक गंभीर संकेत है।
'गोइंग कंसर्न' पर कामकाज, पर अनिश्चितता हावी
इसके बावजूद, कंपनी का मैनेजमेंट का कहना है कि वह 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) आधार पर अपना कामकाज जारी रखेगी। कंपनी का तर्क है कि उस पर कोई कर्ज नहीं है, वह कैश जेनरेट कर सकती है, और कानूनी सलाह भी सकारात्मक है। लेकिन लाइसेंस फीस का यह विशाल विवाद कंपनी के भविष्य पर गहरा अनिश्चितता का बादल मंडरा रहा है।
इम्पेयरमेंट और गिरते रेवेन्यू ने बढ़ाई परेशानी
कंपनी की वित्तीय सेहत एक और बड़ी समस्या से जूझ रही है - भारी-भरकम इम्पेयरमेंट (Impairment) चार्ज। इसकी सब्सिडियरी Dish Infra Services ने अपने इनटैंगिबल एसेट्स पर ₹798 करोड़, कैपिटल एडवांसेज पर ₹202 करोड़ और अन्य एडवांसेज पर ₹120 करोड़ का इम्पेयरमेंट दिखाया है। Videocon d2h से अधिग्रहित संपत्तियों पर भी ₹2,364 करोड़ के गुडविल (Goodwill) और ₹401 करोड़ के प्रॉपर्टी, प्लांट और इक्विपमेंट पर बड़े इम्पेयरमेंट हुए हैं। वहीं, Dish TV के स्टैंडअलोन खातों में ₹3,911 करोड़ गुडविल, ₹1,029 करोड़ ट्रेडमार्क और ब्रांड, और ₹498 करोड़ कस्टमर व डिस्ट्रीब्यूशन रिलेशनशिप पर इम्पेयरमेंट दर्ज किया गया है। इन राइट-डाउन (Write-downs) की वजह से संपत्तियों का मूल्य काफी कम हो गया है।
इसके साथ ही, कंपनी की रेवेन्यू (Revenue) स्ट्रीम भी लगातार गिर रही है। 31 दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹91.95 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹122.39 करोड़ था। स्टैंडअलोन रेवेन्यू भी घटकर ₹39.39 करोड़ रह गया।
रेगुलेटरी झटके और तीखी प्रतिस्पर्धा
Dish TV के लिए मुश्किलें सिर्फ लाइसेंस फीस तक ही सीमित नहीं हैं। कंपनी को NSE और BSE से SEBI बोर्ड कंपोजिशन नियमों का पालन न करने के लिए ₹4,60,000 का जुर्माना भी भरना पड़ा है। यह स्थिति शेयरहोल्डर रिजेक्शन और MIB की मंजूरी में देरी के कारण पैदा हुई।
पूरा DTH सेक्टर ही चुनौतियों से घिरा है। कीमतों पर रेगुलेटरी कंट्रोल के कारण DTH ऑपरेटर, ब्रॉडबैंड और केबल टीवी की तुलना में नुकसान में हैं। वहीं, सरकार की फ्री-टू-एयर सर्विस DD Free Dish और OTT प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते चलन ने पारंपरिक पे-टीवी ऑपरेटर्स के लिए सब्सक्राइबर बेस और रेवेन्यू दोनों को कम कर दिया है। यहां तक कि Tata Play जैसी बड़ी कंपनियों को भी इसी तरह के लाइसेंस फीस विवादों और घटते सब्सक्राइबर बेस के कारण भारी नुकसान और नकारात्मक नेट वर्थ का सामना करना पड़ रहा है।
शेयर की चाल और एनालिस्ट्स की राय
इन तमाम झटकों का असर Dish TV India के शेयर पर भी साफ दिख रहा है। फरवरी 2026 की शुरुआत में, शेयर ₹3.39-3.48 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो इसके 52-सप्ताह के हाई ₹8.81 से काफी नीचे है। पिछले एक साल में शेयर ने -58.02% का भारी गिरावट दर्ज की है।
बाजार के विश्लेषक (Analysts) फिलहाल इस स्टॉक पर न्यूट्रल (Neutral) की राय रखते हैं। एक एनालिस्ट ने ₹6.00 का टारगेट प्राइस दिया है, जो मौजूदा स्तरों से 75% से ज्यादा की तेजी का संकेत देता है। हालांकि, आने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए EPS (Earnings Per Share) का अनुमान -₹0.27 का नकारात्मक है, जो कंपनी की लाभप्रदता (Profitability) की चुनौतियों को दिखाता है।