दिल्ली हाई कोर्ट ने ZEE Entertainment को FIFA World Cup 2026 की लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान दृष्टिबाधित दर्शकों के लिए पहुंच (accessibility) की कमी के संबंध में दायर याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने डिजिटल एक्सेसिबिलिटी के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के दिशानिर्देशों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
क्या है मामला?
दिल्ली हाई कोर्ट ने ZEE Entertainment Enterprises Limited को एक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एक ऐसी कानूनी चुनौती के बाद आया है जिसमें कंपनी के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चल रहे FIFA World Cup 2026 की स्ट्रीमिंग में पहुंच (accessibility) की कमी का आरोप लगाया गया है। वकील राहुल बजाज द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि ZEE5 प्लेटफॉर्म में दृष्टिबाधित उपयोगकर्ताओं के लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण वे सब्सक्रिप्शन होने के बावजूद प्रसारण का आनंद नहीं ले पा रहे हैं।
बिज़नेस के लिए क्यों है अहम?
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के तहत डिजिटल एक्सेसिबिलिटी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। ZEE जैसी बड़ी मीडिया और मनोरंजन कंपनी के लिए, यह कोर्ट की दखलअंदाजी दर्शाती है कि कंपनी की मानक डिजिटल सेवाओं और कानूनी अनुपालन की आवश्यकताओं के बीच एक अंतर हो सकता है। कोर्ट का BIS Standard IS 17802:2022 का पालन करने का निर्देश यह संकेत देता है कि कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म को स्क्रीन-रीडर तकनीक और अन्य एक्सेसिबिलिटी टूल के अनुकूल बनाने के लिए तकनीकी अपग्रेड में निवेश करना पड़ सकता है। इन मानकों को पूरा न करने पर कंपनी को नियामक जांच और कानूनी लागतों का सामना करना पड़ सकता है।
कानूनी और अनुपालन का जोखिम
यह याचिका डिजिटल ब्रॉडकास्टर्स के लिए वैधानिक दायित्वों के बारे में मौलिक सवाल उठाती है। कोर्ट ने कंपनी से उसकी वर्तमान एक्सेसिबिलिटी उपायों के बारे में जानकारी मांगी है। याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से एक एक्सेसिबिलिटी ऑडिट रिपोर्ट और कंपनी की डेवलपमेंट और सपोर्ट टीमों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण की मांग की है। हालांकि कोर्ट ने अभी तक कंपनी के खिलाफ कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है, लेकिन मामले की Ongoing प्रकृति का मतलब है कि ZEE को वर्तमान टूर्नामेंट, जो 19 जुलाई को समाप्त हो रहा है, से पहले प्लेटफॉर्म में सुधार में तेजी लाने का दबाव झेलना पड़ सकता है।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों को कंपनी की आधिकारिक प्रतिक्रिया और दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल की जाने वाली किसी भी अगली फाइलिंग पर नजर रखनी चाहिए। अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित है, जो यह समझने के लिए एक महत्वपूर्ण तारीख होगी कि क्या कोर्ट प्लेटफॉर्म में विशिष्ट संरचनात्मक बदलावों को अनिवार्य करता है। भविष्य के अपडेट यह स्पष्ट करेंगे कि क्या इन अनुपालन आवश्यकताओं के कारण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर महत्वपूर्ण पूंजीगत व्यय होता है या कंपनी के भविष्य के लाइव स्पोर्ट्स प्रसारण के लिए परिचालन रोडमैप प्रभावित होता है।
