भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स अब ब्रांड स्पॉन्सरशिप की अस्थिर कमाई से हटकर सीधे अपने फॉलोअर्स को पेड कंसल्टेशन देने पर फोकस कर रहे हैं। TagMango जैसे प्लेटफॉर्म्स पर क्रिएटर्स की कमाई **₹1,000 करोड़** के आंकड़े को पार कर गई है।
भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव कर रहे हैं। अब वे ब्रांड स्पॉन्सरशिप के भरोसे रहने के बजाय सीधे अपने फॉलोअर्स को पेड कंसल्टेशन (Paid Consultations) की सेवाएं दे रहे हैं। इस बदलाव की मुख्य वजह ब्रांड डील्स से मिलने वाली अनिश्चितता, पेमेंट में देरी और बजट में उतार-चढ़ाव है।
कमाई का नया जरिया
फाइनेंस, B2B मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी जैसे नीश (Niche) में अपनी धाक जमाने वाले क्रिएटर्स अब वन-ऑन-वन मेंटरशिप के लिए भारी फीस चार्ज कर रहे हैं। एक सेशन के लिए क्रिएटर्स ₹10,000 तक की फीस ले रहे हैं, जो तुरंत कैश फ्लो सुनिश्चित करता है। TagMango जैसे प्लेटफॉर्म्स पर क्रिएटर्स की कुल कमाई ₹1,000 करोड़ (अगस्त 2026 तक) के स्तर को पार कर चुकी है।
टेक्नोलॉजी का सहारा
क्रिएटर्स को 'एंटरटेनर' से 'माइक्रो-कंसल्टिंग फर्म' बनाने में AI-पावर्ड टूल्स मदद कर रहे हैं। TagMango ने इस साल 'Mango AI' और 'Mango Studio' जैसे फीचर्स लॉन्च किए हैं, जो शेड्यूलिंग और पेमेंट मैनेजमेंट को आसान बनाते हैं।
चुनौतियां और रिस्क
यह मॉडल जितना आकर्षक है, इसमें चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी हैं। सबसे बड़ी समस्या 'स्केलेबिलिटी' की है, क्योंकि कंसल्टेशन में बहुत ज्यादा समय लगता है और एक क्रिएटर के पास दिन में सीमित घंटे होते हैं। साथ ही, जैसे-जैसे इस फील्ड में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, फीस पर दबाव आने की संभावना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जो क्रिएटर्स सेल्स फनल और कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट जैसी स्किल्स को अपना लेंगे, वही लंबी रेस के घोड़े साबित होंगे। बता दें कि भारतीय इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग इंडस्ट्री 2026 के अंत तक ₹4,000 करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान है।
