AI स्टूडियो और लागत में कटौती का प्लान
Collective Artists Network (CAN) अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से कंटेंट प्रोडक्शन में बड़ा बदलाव ला रहा है। कंपनी का मकसद सिर्फ एफिशिएंसी बढ़ाना नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर कंटेंट तैयार करना है, खासकर फैंटेसी और माइथोलॉजी जॉनर में। CEO विजय सुब्रमण्यम का कहना है कि यह "माइंडलेस प्रॉम्प्टिंग नहीं, बल्कि हार्डकोर इंजीनियरिंग" है, जिसका लक्ष्य कंटेंट निर्माण को ज़्यादा किफ़ायती बनाना और ट्रेडिशनल बड़े प्रोडक्शन के हाई कॉस्ट से बचना है। CAN ने इस दिशा में AI स्टूडियो Galleri5 बनाया है, जिसके लिए एक डीप-टेक कंपनी का अधिग्रहण भी किया है।
AI से ग्रोथ और फंडिंग
CAN का AI पर फोकस इसके फाइनेंशियल नतीजों और मार्केट पोजीशन को मज़बूत कर रहा है। कंपनी ने मार्च 31, 2025 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में ₹423 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो 56% के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) को दर्शाता है। मार्च 2026 तक अनुमानित ₹862 करोड़ के वैल्यूएशन के साथ, इसकी ग्रोथ को Glance और Nepean Capital जैसे इन्वेस्टर्स से मिले $16.5 मिलियन (लगभग ₹137 करोड़) की फंडिंग का सहारा है, जिसमें निखिल कामत ने भी निवेश किया है। यह फाइनेंशियल ताक़त कंपनी को दुबई और साउथईस्ट एशिया में विस्तार करने में मदद कर रही है। AI की एफिशिएंसी से प्रोडक्शन कॉस्ट में 60-70% तक की कमी और प्रोजेक्ट टाइमलाइन को हफ्तों से घटाकर दिनों में लाने का अनुमान है, जिससे "महाभारत" और "हनुमान" जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स को छोटी, केंद्रित टीमों द्वारा बनाया जा सकेगा।
भारतीय मीडिया मार्केट में CAN की जगह
CAN भारत के तेज़ी से बदलते मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में सक्रिय है, जहाँ AI को तेज़ी से अपनाया जा रहा है। भारतीय जेनरेटिव AI इन मीडिया एंड एंटरटेनमेंट मार्केट के 2025 से 2035 के बीच 38.62% CAGR की दर से बढ़ने की उम्मीद है। यह ग्रोथ डिजिटल और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर बेहतर, पर्सनलाइज्ड कंटेंट की मांग से प्रेरित है। CAN के AI टूल्स प्राइवेट हैं, लेकिन इंडस्ट्री Runway.ml, Claude और Gemini जैसे टूल्स का इस्तेमाल कंटेंट क्रिएशन और विज़ुअल इफेक्ट्स के लिए कर रही है। इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में Gushcloud और Samy for Brands जैसे कंपटीटर्स हैं। CAN का लक्ष्य सिर्फ टैलेंट मैनेज करना नहीं, बल्कि क्रिएटर्स के लिए एक फुल-फ्लेज्ड प्लेटफॉर्म बनाना है, जो इंडस्ट्री के टेक्नोलॉजी-संचालित कंटेंट ट्रेंड के अनुरूप है।
AI के रिस्क: कॉपीराइट, सैचुरेशन और इंटरनल चुनौतियाँ
कंटेंट बनाने के लिए AI का इस्तेमाल करने में बड़े रिस्क भी शामिल हैं। एक बड़ा मुद्दा कॉपीराइट उल्लंघन और साहित्यिक चोरी की संभावना है। AI मॉडल विशाल डेटासेट से सीखते हैं, जिसमें अक्सर कॉपीराइटेड मटेरियल होता है, जिसके परिणामस्वरूप आउटपुट अनजाने में मौजूदा कार्यों के समान हो सकते हैं। इससे मालिकाना हक़ को लेकर जटिल कानूनी सवाल खड़े होते हैं और महंगे मुकदमे हो सकते हैं। इसके अलावा, आसानी से जनरेट होने वाले AI कंटेंट से प्लेटफॉर्म्स पर कम-क्वालिटी वाले, समान मटेरियल की बाढ़ आ सकती है, जिससे ओरिजिनैलिटी और मानव रचनात्मकता कम हो जाएगी। एक और रिस्क यह भी है कि अगर क्रिएटर्स AI पर ज़्यादा निर्भर हो गए तो उनके अपने कौशल में कमी आ सकती है। इंटरनली, जबकि CAN कुल मिलाकर प्रॉफिटेबल है, Big Bang Records और Glance Collective जैसे कुछ एक्वायर्ड बिज़नेस ने घाटा दिखाया है, जो इसके विभिन्न वेंचर्स को मैनेज करने में संभावित चुनौतियों की ओर इशारा करता है।
ग्लोबल एक्सपेंशन और IPO की योजनाएं
अपने AI कंटेंट टूल्स के अलावा, Collective Artists Network ग्लोबल ग्रोथ और संभावित पब्लिक लिस्टिंग का लक्ष्य रखता है। कंपनी ने दुबई में एक ऑफिस खोला है, जो मध्य पूर्व में उसका पहला कदम है, और साउथईस्ट एशिया में आगे के विस्तार की योजना है। इस ग्लोबल पुश का उद्देश्य भारतीय टैलेंट को अंतर्राष्ट्रीय अवसरों से जोड़ना और टैलेंट मैनेजमेंट, डिजिटल मीडिया, IP डेवलपमेंट और कंटेंट क्रिएशन में ग्राहकों की एक विस्तृत श्रृंखला की सेवा करना है। CAN वर्तमान में एक पब्लिक लिस्टिंग की संभावना तलाश रहा है, जिसके बारे में अगले साल और जानकारी मिलने की उम्मीद है, क्योंकि यह ग्रोथ के लिए कैपिटल जुटाने और निवेशकों को रिटर्न देने की तलाश में है। कंपनी की महत्वाकांक्षा क्रिएटर इकोसिस्टम का "रिलायंस" बनना है, जो एक बिखरे हुए उद्योग को व्यवस्थित करे और मीडिया और टेक्नोलॉजी में नए मानक स्थापित करे।