The Odyssey' के फिल्म में आने के बाद भारत में क्लासिक लिटरेचर, खासकर होमर की किताब 'The Odyssey' की छपी हुई कॉपी की बिक्री दोगुना हो गई है। यह तेज़ी खासकर **18-20** साल के युवा पाठकों की ओर से आ रही है, जिसने सस्ती पेपरबैक से लेकर प्रीमियम ट्रांसलेशन वाली किताबों की डिमांड बढ़ा दी है।
'The Odyssey' फिल्म का क्लासिक लिटरेचर पर जादू
क्रिस्टोफर नोलन की 'The Odyssey' फिल्म के रिलीज होते ही भारत में क्लासिक लिटरेचर में लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। किताबों की दुकानों पर होमर की 3,000 साल पुरानी महाकाव्य 'The Odyssey' की छपी हुई कॉपी की बिक्री पिछले साल के मुकाबले दोगुनी हो गई है। यह एक ऐसा दुर्लभ मौका है जब किसी फिल्म ने सीधे तौर पर पुरानी साहित्यिक कृतियों को युवाओं के बीच इतना लोकप्रिय बना दिया है।
बुकस्टोर्स और डिमांड पर असर
यह बढ़ी हुई मांग खासतौर पर 18 से 20 साल के युवा पाठकों में देखी जा रही है। हालांकि इस उम्र के युवाओं में क्लासिक्स में दिलचस्पी पहले से बढ़ रही थी, लेकिन फिल्म ने इसे एक बड़ा बूस्ट दिया है। मार्केट के आंकड़े बताते हैं कि सस्ती पेपरबैक कॉपी की बिक्री में सबसे ज्यादा तेजी आई है, कुछ एडिशन की बिक्री तो दस गुना तक बढ़ गई है। खासतौर पर पेंगुइन के 'ब्लैक क्लासिक्स' एडिशन (E.V. Rieu ट्रांसलेशन) को काफी पसंद किया जा रहा है। वहीं, ₹1,000 से ₹2,000 तक की महंगी एकेडमिक एडिशन की भी सप्लाई कम पड़ रही है; जैसे एमिली विल्सन के ट्रांसलेशन वाली कॉपी की डिमांड इतनी ज्यादा है कि स्टॉक खत्म हो गया है।
सेक्टर पर व्यापक असर
यह ट्रेंड सिर्फ एक किताब तक सीमित नहीं है। बुकसेलर्स का कहना है कि 'The Iliad' और ग्रीक माइथोलॉजी (Greek Mythology) से जुड़ी दूसरी क्लासिक किताबों में भी दिलचस्पी बढ़ी है। इतना ही नहीं, इन मिथकों पर आधारित मॉडर्न फिक्शन, जैसे मैडलिन मिलर की किताबें, उनकी बिक्री में भी अच्छा उछाल देखने को मिला है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह बढ़ती दिलचस्पी माइथोलॉजी और क्लासिक्स की पूरी बुक कैटेगरी में फैल रही है, जिसका फायदा उन पब्लिशर्स और रिटेलर्स को हो रहा है जिनके पास इन जॉनर में मजबूत कैटलॉग है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
इस ट्रेंड पर निवेशकों की पहली नजर पब्लिशर्स और बुक चेन की सप्लाई चेन मैनेजमेंट पर रहेगी कि वे बढ़ती हुई मांग को कैसे पूरा कर पाते हैं। हालांकि, फिजिकल बुक रिटेलर्स और क्लासिकल कैटलॉग वाली पब्लिशिंग कंपनियों के लिए यह एक अच्छा संकेत है, लेकिन इस दिलचस्पी की असलियत इस बात पर निर्भर करेगी कि यह युवाओं का जुड़ाव परमानेंट रीडिंग हैबिट में बदलता है या सिर्फ फिल्म के थियेटर रन तक ही सीमित रहता है। रिटेल बुक डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी कंपनियों के निवेशक यह देखेंगे कि क्या यह मोमेंटम उनके तिमाही रेवेन्यू में तब्दील होता है।
