2025 के Kroll Celebrity Brand Valuation रिपोर्ट के अनुसार, अब विज्ञापन सौदों के लिए डिजिटल उपस्थिति बॉक्स-ऑफिस प्रदर्शन से ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। डिजिटल एंडोर्समेंट (Digital Endorsements) कुल सौदों का **60-75%** हिस्सा बनाते हैं। शाहरुख खान ने हाल में कोई फिल्म रिलीज़ न होने के बावजूद रैंकिंग में टॉप किया है। हालांकि, सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट का बाज़ार कुल मिलाकर **3.7%** गिर गया है, जो विज्ञापन खर्च में नरमी का संकेत देता है।
डिजिटल में बढ़ा सितारों का जलवा, बॉक्स ऑफिस पीछे
भारतीय सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट (Celebrity Endorsement) की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। अब सोशल मीडिया पर सितारों की सक्रियता, उनकी फिल्मों की बॉक्स-ऑफिस कमाई से ज़्यादा कीमती साबित हो रही है। Kroll Celebrity Brand Valuation 2025 रिपोर्ट, जो 5 अगस्त 2026 को जारी हुई, के मुताबिक, ब्रांड अब फिल्मों की रिलीज़ से मिलने वाले तात्कालिक फायदे के बजाय सितारों की लगातार डिजिटल मौजूदगी को ज़्यादा महत्व दे रहे हैं। डिजिटल एंडोर्समेंट (Digital Endorsements) से होने वाले सौदों की मात्रा अब कुल सौदों की 60-75% हो गई है, जो कुछ साल पहले तक 40-60% थी।
डिजिटल शिफ्ट में शाहरुख खान सबसे आगे
$17.79 करोड़ की अनुमानित वैल्यू के साथ, शाहरुख खान 2025 में भारत के सेलिब्रिटी ब्रांड वैल्यूएशन में सबसे ऊपर बने हुए हैं। यह रैंकिंग इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने हाल ही में कोई बड़ी फिल्म रिलीज़ नहीं की है। यह दिखाता है कि आजकल के विज्ञापनदाता उनकी ऑनलाइन मौजूदगी, रोज़ाना दर्शकों से जुड़ने की क्षमता को ज़्यादा महत्व दे रहे हैं। ब्रांड्स के लिए, यह किसी एक फिल्म के अनिश्चित प्रदर्शन पर निर्भर रहने की तुलना में कम जोखिम वाला निवेश है।
बाज़ार का हाल और जोखिम
जहां डिजिटल एंडोर्समेंट की मांग बढ़ रही है, वहीं सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट का पूरा बाज़ार सिकुड़ता हुआ दिख रहा है। 2025 में भारत के टॉप 25 सेलिब्रिटी ब्रांड्स की कुल वैल्यू 3.7% घटकर $2 अरब रह गई। यह गिरावट बताती है कि व्यक्तिगत सितारों के लिए डिजिटल प्रासंगिकता महत्वपूर्ण होने के बावजूद, एंडोर्समेंट पर कुल विज्ञापन खर्च पर मैक्रो दबाव हो सकता है।
रणवीर सिंह, जिनकी वैल्यू $16.29 करोड़ है, और विराट कोहली, जिनकी वैल्यू $15.84 करोड़ है, जैसे अन्य टॉप सितारे भी अपने मज़बूत और लगातार बने रहने वाले पर्सनल ब्रांड की बदौलत इस क्षेत्र पर हावी हैं। निवेशकों और उद्योग पर नज़र रखने वालों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच अगले साल बाज़ार की कुल वैल्यू को स्थिर कर सकती है, या क्या ब्रांड सोशल मीडिया पर सक्रियता के बावजूद एंडोर्समेंट बजट में कटौती जारी रखेंगे।
