सरकार के नए निर्देश के बाद, भारत के कैबिनेट मंत्रियों ने Instagram पर अपनी पोस्टिंग **13%** बढ़ा दी है। यह कदम युवा वोटरों से बेहतर जुड़ने और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर राजनीतिक संवाद को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
Detailed Coverage
नई डिजिटल रणनीति का असर
भारतीय कैबिनेट में डिजिटल संवाद को लेकर एक नई हलचल देखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद, करीब एक-तिहाई मंत्रियों ने Instagram पर अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। 13 जुलाई से 26 जुलाई, 2026 के बीच, मंत्रियों की पोस्टिंग में कुल मिलाकर 13% का इजाफा दर्ज किया गया है। यह कदम सोशल मीडिया पर युवा पीढ़ी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उठाया गया है, जैसा कि हाल के विरोध प्रदर्शनों से भी साफ हुआ है।
किसने बढ़ाई सबसे ज्यादा एक्टिविटी?
अलग-अलग मंत्रियों के खातों में इस डिजिटल सक्रियता का स्तर काफी भिन्न है। सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री वीरेंद्र कुमार ने तो एक हफ्ते में 60 से ज्यादा पोस्ट करके सबको चौंका दिया, जबकि पहले वे ज्यादा सक्रिय नहीं थे। वहीं, मनसुख मंडाविया और सर्बानंद सोनोवाल जैसे मंत्रियों ने भी अपनी पोस्ट की संख्या में खासी बढ़ोतरी की है। एस. जयशंकर और गिरिराज सिंह जैसे प्रमुख मंत्रियों ने भी इस दौरान अपनी साप्ताहिक पोस्टिंग फ्रीक्वेंसी लगभग दोगुनी कर दी।
पब्लिक एंगेजमेंट का हाल
हालांकि, पोस्ट की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन जनता से मिलने वाली प्रतिक्रिया (एंगेजमेंट) मिली-जुली है। प्रह्लाद जोशी और चिराग पासवान जैसे मंत्री फिलहाल सबसे ज्यादा पब्लिक इंटरैक्शन हासिल कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि पोस्टिंग की संख्या ही डिजिटल प्रभाव का एकमात्र पैमाना नहीं है। अमित शाह ने इस दौरान कोई नई पोस्ट न करते हुए भी दर्शकों से लगातार जुड़ाव बनाए रखा, जो उनकी स्थायी पहुंच को दर्शाता है। इसी तरह, अश्विनी वैष्णव और शिवराज सिंह चौहान जैसे मंत्रियों की पोस्टिंग फ्रीक्वेंसी कम होने के बावजूद उनके फॉलोअर्स से अच्छी-खासी एंगेजमेंट बनी रही।
यह Instagram की ओर रणनीतिक बदलाव, सरकार के युवा नागरिकों से जुड़ने के तरीके को अपनाने का एक बड़ा प्रयास दिखाता है। भविष्य में यह देखना अहम होगा कि क्या यह बढ़ी हुई गतिविधि स्थायी जुड़ाव में बदलती है या आने वाले महीनों में पब्लिक की प्रतिक्रिया स्थिर हो जाती है।
