इंडियन ब्रॉडकास्टर्स ने त्योहारी सीजन से पहले विज्ञापनों में भरोसा जगाने के लिए तत्काल BARC टीवी रेटिंग्स की वापसी की मांग की है। साथ ही, विज्ञापनों की समय-सीमा पर लगी **10+2** की पाबंदी हटने से कंपनियों को अब अपनी इन्वेंट्री मैनेज करने की ज्यादा आजादी मिलेगी।
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन ने अपनी 27वीं एनुअल जनरल मीटिंग में टीवी रेटिंग्स को तुरंत बहाल करने का मुद्दा उठाया है। ब्रॉडकास्टर्स का तर्क है कि बिना रेटिंग्स के एडवर्टाइजर्स के लिए कमर्शियल प्लानिंग करना मुश्किल हो रहा है, खासकर फेस्टिव सीजन के दौरान जब डिजिटल और टीवी के बीच बजट को लेकर तगड़ा मुकाबला होता है।\n\n### एडवर्टाइजिंग में आजादी\nसरकार ने केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स, 1994 के नियम 7(11) को खत्म कर दिया है, जो पहले प्रति घंटे 10 मिनट विज्ञापन और 2 मिनट के एडवर्टाइजिंग समय तक सीमित था। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) द्वारा 2012 के रेगुलेशंस को हटाने से अब ब्रॉडकास्टर्स को अपने शेड्यूल में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी। हालांकि, असली चुनौती यह होगी कि क्या कंपनियां बिना दर्शकों को खोए इस आजादी को मुनाफे में बदल पाती हैं।\n\n### इंडस्ट्री का दम\nसाल 2025 में टीवी इंडस्ट्री ने लगभग ₹617 अरब का रेवेन्यू जेनरेट किया था, जो देश के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर का 22% हिस्सा है। 831 मिलियन दर्शकों की पहुंच के साथ, टीवी आज भी एक पावरफुल मीडियम बना हुआ है। Zee Entertainment, Sun TV Network, और Network18 जैसे बड़े प्लेयर्स का पूरा बिजनेस मॉडल विज्ञापनों पर टिका है, इसलिए यह खबर इनके लिए काफी मायने रखती है। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि इस नई आजादी का इस्तेमाल कंपनियां अपने रेवेन्यू को बूस्ट करने के लिए कैसे करती हैं।
