ब्रांड्स क्षेत्रीय भाषा के विज्ञापनों को बढ़ावा दे रहे हैं, भारत में बढ़ती उपभोक्ता भावना का लाभ उठाने के लिए

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AuthorWhalesbook News Team|Published at:
ब्रांड्स क्षेत्रीय भाषा के विज्ञापनों को बढ़ावा दे रहे हैं, भारत में बढ़ती उपभोक्ता भावना का लाभ उठाने के लिए
Overview

भारतीय ब्रांड छोटे शहरों के उपभोक्ताओं से जुड़ने के लिए क्षेत्रीय भाषा के विज्ञापन अभियानों में अपना निवेश काफी बढ़ा रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, 79% उपयोगकर्ता अपनी स्थानीय भाषा में विज्ञापनों पर बेहतर प्रतिक्रिया देते हैं, जिसके चलते 70% विपणक (marketers) 2025 के लिए राज्य-विशिष्ट अभियानों की योजना बना रहे हैं। इस बदलाव का मतलब है कि क्षेत्रीय विज्ञापन खर्च बढ़ रहा है, जो एक मुख्य रणनीति बन रहा है, हालांकि कई ब्रांड अभी भी गहरी पैठ के लिए केवल डबिंग पर निर्भर हैं, न कि वास्तविक सांस्कृतिक अनुकूलन पर।

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भारत भर के टियर-II और टियर-III शहरों में बढ़ती उपभोक्ता रुचि को भुनाने के लिए ब्रांड क्षेत्रीय भाषा के अभियानों के लिए अपने विज्ञापन बजट को काफी बढ़ा रहे हैं। Affle की Festive Pulse 2025 रिपोर्ट के अनुसार, 79% उपयोगकर्ता अपनी स्थानीय भाषाओं में प्रस्तुत विज्ञापनों के साथ बेहतर ढंग से जुड़ते हैं। इस अंतर्दृष्टि ने 70% विपणक को 2025 के लिए राज्य-विशिष्ट अभियान विकसित करने के लिए प्रेरित किया है। परिणामस्वरूप, क्षेत्रीय विज्ञापन व्यय में साल-दर-साल वृद्धि देखी गई है, जो अब उत्सव विज्ञापन बजट का 25% है, जो पहले 20% था। यह एक मौलिक बदलाव का प्रतीक है, जो वर्नाक्युलर मार्केटिंग को ब्रांडों के लिए एक प्राथमिक रणनीति के रूप में स्थापित करता है।

इस प्रवृत्ति के कारण क्षेत्रीय विज्ञापन की लागत बढ़ गई है। क्षेत्रीय भाषा के प्रभावित करने वाले (influencers) अपनी ऑफ-सीज़न दरों से 15-30% अधिक शुल्क ले रहे हैं, और कनेक्टेड टीवी (CTV) और ओवर-द-टॉप (OTT) क्षेत्रीय फीड पर प्रमुख विज्ञापन स्लॉट में कॉस्ट पर मिले (CPM) में दोहरे अंकों की वृद्धि देखी जा रही है। क्षेत्रीय प्रिंट मीडिया भी उच्च प्रीमियम की मांग करता है, जिसमें प्रकाशक कम छूट देते हैं। डिजिटल विज्ञापन अब कुल विज्ञापन खर्च का 40% से अधिक है, जिसमें लगभग 80% उपभोक्ता अपनी मूल भाषा में विज्ञापनों को पसंद करते हैं। ब्रांड इन बहुभाषी प्रयासों में 10-20% अधिक उत्सव बजट लगा रहे हैं।

हालांकि, कई ब्रांड वास्तविक जुड़ाव हासिल करने के लिए संघर्ष करते हैं, अक्सर राष्ट्रीय अभियानों को स्थानीय भाषाओं में केवल डब करने का सहारा लेते हैं। निशा संपथ जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक प्रस्तोता (endorser) को बदलने जबकि मुख्य संदेश वही रखना, "सिर्फ डबिंग करने से थोड़ा कम आलसी" है। सच्ची सफलता प्रामाणिक स्थानीयकरण (authentic localization) में निहित है, जैसा कि सुकृति सेखरी बताती हैं, जहां विज्ञापन क्षेत्रीय मुहावरों (idioms) और हास्य का उपयोग करके, केवल अनुवाद होने के बजाय, स्थानीय संदर्भ के साथ सार्थक रूप से मिश्रित होते हैं। अमेज़ॅन इंडिया के 'और दिखाओ' अभियान और गूगल इंडिया के इमर्सिव विज्ञापन जैसे सफल उदाहरण सांस्कृतिक प्रवाह (cultural fluency) और प्रासंगिक परिदृश्यों की शक्ति को गूंज पैदा करने के लिए प्रदर्शित करते हैं।

प्रभाव:
यह प्रवृत्ति भारतीय मीडिया कंपनियों, प्रकाशकों और मार्केटिंग टेक्नोलॉजी प्रदाताओं के राजस्व को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने वाली है जो क्षेत्रीय अभियानों की सुविधा प्रदान करते हैं। यह एक परिपक्व विज्ञापन बाजार का संकेत देता है, जो विविध भारतीय उपभोक्ता आधार तक पहुंचने के लिए अधिक प्रभावी और स्थानीयकृत रणनीतियों की ओर बढ़ रहा है। ब्रांडों के लिए, सफल स्थानीयकरण से अभियान की प्रभावशीलता में सुधार हो सकता है और संभावित रूप से बिक्री प्रदर्शन मजबूत हो सकता है। रेटिंग: 8/10।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.