सिनेमा एडवरटाइजिंग का धमाका: 'Dhurandhar 2' जैसी फिल्में मचा रही धूम!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
सिनेमा एडवरटाइजिंग का धमाका: 'Dhurandhar 2' जैसी फिल्में मचा रही धूम!
Overview

भारत में सिनेमा में विज्ञापन (Advertising) का बाजार फिर से तेजी पकड़ रहा है। 'Dhurandhar 2' जैसी बड़ी फिल्मों की सफलता इस रिवाइवल (Revival) की मुख्य वजह बन रही है। सिनेमा, डिजिटल शोरगुल से हटकर, ब्रांड्स को दर्शकों का पूरा ध्यान आकर्षित करने और गहरी स्टोरीटेलिंग का मौका दे रहा है, जिससे ब्रांड एंगेजमेंट (Engagement) और रिकॉल (Recall) काफी बढ़ रहा है। भले ही मेजरमेंट (Measurement) में कुछ चुनौतियां हों, सिनेमा अभी भी एक पावरफुल चैनल बना हुआ है। हालांकि डिजिटल एडवरटाइजिंग भारत के एड मार्केट में सबसे आगे है, सिनेमा अपनी खास जगह बना रहा है।

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ब्लॉकबस्टर फिल्मों का जलवा

यह रिवाइवल (Revival) बड़ी फिल्मों के सांस्कृतिक और व्यावसायिक प्रभाव का नतीजा है। हालिया ब्लॉकबस्टर 'Dhurandhar 2' इसका एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसने UFO Cine Media Network के बड़े डिजिटल सिनेमा नेटवर्क पर 70 से ज़्यादा नेशनल ब्रांड्स और लगभग 400 एडवरटाइजर्स (Advertisers) को आकर्षित किया है। यह उछाल इस बात का संकेत है कि बड़ी थिएट्रिकल रिलीज़ (Theatrical Releases) को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि लाखों दर्शकों तक पहुंचने वाले मास-रीच मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के तौर पर देखा जा रहा है।

'KGF Chapter 2' और 'Pushpa' जैसी पिछली बड़ी सफलताओं ने सिनेमा की हाई-डिमांड एड इन्वेंट्री (Ad Inventory) बनाने की क्षमता दिखाई है, और 'Dhurandhar 2' इस पैटर्न को दोहराने के लिए तैयार है। फिल्म के फ्रेंचाइजी (Franchise) प्रोजेक्शन (Projections) ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा हो सकते हैं। UFO Cine Media Network का अनुमान है कि 'Dhurandhar 2' पूरे देश में 60 मिलियन (6 करोड़) से ज़्यादा लोगों को आकर्षित कर सकती है, जो कुल रीच (Reach) का लगभग 40% हिस्सा होगा। एफएमसीजी (FMCG), ऑटोमोबाइल्स (Automobiles), बीएफएसआई (BFSI), स्मार्टफोन्स (Smartphones) और कंस्ट्रक्शन (Construction) जैसे विभिन्न सेक्टर्स के एडवरटाइजर्स भारी निवेश कर रहे हैं, जिनमें L’Oréal, UltraTech Cement, Mahindra, और Samsung जैसे ब्रांड्स शामिल हैं।

सिनेमा का 'फोकस्ड ऑडियंस' एडवांटेज

डिजिटल फ्रेगमेंटेशन (Fragmentation) और अटेंशन स्पैन (Attention Span) के घटते दौर में, सिनेमा दर्शकों को बिना किसी रुकावट के ध्यान केंद्रित करने की जगह देता है। इंडस्ट्री लीडर्स का मानना है कि मूवी थियेटर्स का डिस्ट्रेक्शन-फ्री एनवायरनमेंट (Environment) ब्रांड मैसेज के प्रति ज़्यादा रिसेप्टिविटी (Receptivity) पैदा करता है, जिससे यह स्टोरीटेलिंग-लेड कैम्पेन (Campaigns) के लिए बेहद असरदार होता है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के विपरीत है, जहाँ कंज्यूमर्स अक्सर मल्टीटास्क (Multitask) करते हैं और एड्स को स्किप (Skip) कर देते हैं।

सिनेमा का इमर्सिव (Immersive) नेचर ब्रांड्स को गहरे इमोशनल कनेक्शन (Emotional Connections) बनाने और बेहतर रिकॉल (Recall) हासिल करने में मदद करता है, जो कि लंबे समय तक असर छोड़ने वाले ब्रांड्स के लिए एक बड़ा फायदा है। UFO Cine Media Network के कंट्री हेड (Country Head) - एंटरप्राइज बिज़नेस (Enterprise Business), Sachinn Guptaa कहते हैं कि व्यूअर्स (Viewers) ब्लॉकबस्टर स्क्रीनिंग के दौरान ब्रांड स्टोरीज (Brand Stories) के प्रति ज़्यादा खुले होते हैं, जिससे एंगेजमेंट (Engagement) मज़बूत होता है। हालांकि 2026 तक भारत के एड स्पेंड (Ad Spend) का 64% हिस्सा डिजिटल एडवरटाइजिंग का होगा, सिनेमा की फोकस्ड अटेंशन (Focused Attention) को कैप्चर करने की क्षमता अनूठी स्ट्रैटेजिक वैल्यू (Strategic Value) प्रदान करती है।

सिर्फ रीच नहीं, 'टारगेटिंग' और 'इम्पैक्ट' भी

सिर्फ़ रीच (Reach) के अलावा, सिनेमा नेटवर्क्स अब सोफिस्टिकेटेड रीजनल टारगेटिंग (Regional Targeting) भी ऑफर कर रहे हैं। जैसे-जैसे फिल्में खास इलाकों में मज़बूत अपील हासिल करती हैं, एडवरटाइजर्स इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल लोकलाइज्ड कैम्पेन (Localized Campaigns) के लिए कर सकते हैं जो सटीक ऑडियंस डेमोग्राफिक्स (Audience Demographics) से मेल खाते हों, और साथ ही नेशनल रिलीज़ के स्केल का फायदा भी उठा सकें। यह डिटेल्ड टारगेटिंग, प्रीमियम व्यूइंग एनवायरनमेंट (Premium Viewing Environment) के साथ मिलकर, सिनेमा को सिर्फ एक सप्लीमेंट्री मीडियम (Supplementary Medium) नहीं, बल्कि हाई-इम्पैक्ट (High-Impact), इमेज-बिल्डिंग कैम्पेन (Image-Building Campaigns) के लिए एक कोर चैनल (Core Channel) बनाती है।

ब्रांड्स के लिए, सिनेमा अवेयरनेस (Awareness) और ट्रस्ट (Trust) बनाने में मदद करता है, जिसे बाद में डायरेक्ट एक्शन (Direct Action) और सेल्स (Sales) को बढ़ावा देने वाले डिजिटल चैनल्स द्वारा रीइन्फोर्स्ड (Reinforced) किया जा सकता है। 'Dhurandhar 2 – The Revenge' और 'Toxic' की आने वाली डुअल रिलीज़ (Dual Release) से उम्मीद है कि यह कुल मिलाकर लगभग 100 मिलियन (10 करोड़) लोगों को आकर्षित करेगी, जो बड़े फिल्म इवेंट्स के दौरान कंसंट्रेटेड ऑडियंस एंगेजमेंट (Concentrated Audience Engagement) की क्षमता को दर्शाता है।

चुनौतियां और आलोचनाएं

इस वापसी के बावजूद, सिनेमा एडवरटाइजिंग कई स्ट्रक्चरल चैलेंजेज (Structural Challenges) का सामना कर रही है। एड रेवेन्यू (Ad Revenue) रिकवर हो रहा है, लेकिन यह अभी तक प्री-पैंडेमिक लेवल्स (Pre-Pandemic Levels) को पार नहीं कर पाया है, 2025 में लगभग ₹877 करोड़ पर स्थिर है, जो भारत के कुल ₹1.55 लाख करोड़ के एडएक्स (AdEx) का सिर्फ 0.57% है। इसकी ग्रोथ कुछ ही प्रमुख फिल्मों पर बहुत ज़्यादा निर्भर करती है, जिससे सालाना मीडिया प्लानिंग (Media Planning) मुश्किल हो जाती है और फिल्म क्वालिटी (Film Quality) से जुड़ी अनप्रेडिक्टेबल इन्वेंट्री अवेलेबिलिटी (Unpredictable Inventory Availability) पैदा होती है।

मीडिया प्लानर्स (Media Planners) रीच (Reach), फ्रीक्वेंसी (Frequency) और कैम्पेन इफेक्टिवनेस (Campaign Effectiveness) के सीमित रोबस्ट मेजरमेंट (Robust Measurement) को लेकर चिंता जताते हैं, जिससे डेटा-फोक्स्ड डिजिटल ऑप्शंस (Data-Focused Digital Options) की तुलना में सिनेमा पर खर्च को सही ठहराना कठिन हो जाता है। कनेक्टेड टीवी (Connected TV - CTV), जो डिजिटल मेजरमेंट के साथ अच्छी तरह फिट बैठता है, एक बढ़ता हुआ कॉम्पिटिटिव चैलेंज (Competitive Challenge) पेश करता है। इसके अलावा, कंज्यूमर्स (Consumers) थिएटर में एड सैचुरेशन (Ad Saturation) के बारे में लगातार आवाज़ उठा रहे हैं, कुछ मल्टीप्लेक्स (Multiplexes) ज़्यादा विज्ञापनों से होने वाली रुकावट के लिए आलोचना का सामना कर रहे हैं। हालांकि 42% व्यूअर्स (Viewers) सिनेमा एड्स से इन्फ्लुएंस (Influenced) होने की बात स्वीकार करते हैं, प्रभाव को घुसपैठ से संतुलित करना इंडस्ट्री के लिए एक की कंसीडरेशन (Key Consideration) बना हुआ है।

सिनेमा एडवरटाइजिंग का भविष्य

इंडस्ट्री वॉचर्स (Industry Watchers) लोकेशन-बेस्ड एडवरटाइजिंग (Location-Based Advertising) में लगातार ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, जिसके प्रोजेक्शन (Projections) 2026 में 8.9% विस्तार का सुझाव देते हैं। भारत का ओवरऑल एडवरटाइजिंग मार्केट (Overall Advertising Market) 2026 तक ₹1.74 लाख करोड़ से ₹2.01 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें डिजिटल मीडिया (Digital Media) का दबदबा रहेगा।

इस मार्केट के भीतर, सिनेमा एडवरटाइजिंग हाई-इम्पैक्ट (High-Impact), ब्रांड-बिल्डिंग चैनल (Brand-Building Channel) के रूप में अपनी भूमिका बनाए रखेगा। थियेट्रिकल व्यूइंग हैबिट्स (Theatrical Viewing Habits) का लगातार इवोल्यूशन (Evolution) और 2026 तक अपेक्षित बिग-टिकट रिलीज़ (Big-Ticket Releases) का एक स्ट्रांग पाइपलाइन (Strong Pipeline) ब्रांड्स के लिए हाई-विजिबिलिटी कंटेंट (High-Visibility Content) के साथ जुड़ने के लगातार अवसर सुझाता है। जैसे-जैसे ब्रांड्स एड क्लटर (Ad Clutter) से निकलने के प्रभावी तरीके खोज रहे हैं, स्टोरीटेलिंग और फोकस्ड अटेंशन (Focused Attention) के लिए सिनेमा का अनोखा एनवायरनमेंट (Environment) इसकी स्ट्रैटेजिक रेलेवेंस (Strategic Relevance) सुनिश्चित करता है, जो ब्रॉडर डिजिटल मीडिया इकोसिस्टम (Broader Digital Media Ecosystem) को कॉम्प्लीमेंट (Complement) करता है।

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