इनटैन्जिबल एसेट्स की वैल्यूएशन का नया तरीका
सेलेब्रिटी की हैसियत की फाइनेंशियल वैल्यूएशन अब सिर्फ कमाई के आंकड़ों से कहीं आगे निकल गई है। इंटरब्रांड और फॉर्च्यून इंडिया के नए फ्रेमवर्क में कमाई की जगह सोशल एंगेजमेंट और ब्रांड की विश्वसनीयता पर जोर दिया गया है। इंडस्ट्री अब सेलेब्रिटी वैल्यू को एक अलग, ट्रेड होने वाले कॉर्पोरेट एसेट की तरह देख रही है। विराट कोहली का इस लिस्ट में टॉप पर आना सिर्फ उनकी पॉपुलैरिटी नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि वे बड़े मार्केटिंग कैंपेन को इस तरह से संभाल सकते हैं कि पार्टनर्स के लिए रिस्क कम हो।
अलग-अलग सेक्टर्स में वैल्यूएशन का अंतर
कोहली, एम.एस. धोनी और सचिन तेंदुलकर जैसे स्पोर्ट्स स्टार टॉप 10 में अपनी जगह बनाए हुए हैं। लेकिन लिस्ट यह भी दिखाती है कि उनकी ब्रांड लाइफटाइम वैल्यू, फिल्म स्टार्स की तुलना में ज्यादा टिकाऊ है। जहां फिल्म स्टार्स की ब्रांड वैल्यू उनकी फिल्मों की बॉक्स ऑफिस परफॉर्मेंस के साथ बदलती रहती है, वहीं क्रिकेटर्स एक खास तरह की 'रेसिलिएंस-बेस्ड' ब्रांड वैल्यू दिखाते हैं। यह एक बड़े मैक्रोइकोनॉमिक बदलाव को दर्शाता है, जहाँ ब्रांड्स अस्थिर एंटरटेनमेंट प्रोजेक्ट्स से हटकर खिलाड़ियों की स्थिरता पर दांव लगा रहे हैं।
सेलेब्रिटी लिक्विडिटी के रिस्क
सेलेब्रिटी को एक स्टेबल इकोनॉमिक एसेट मानना इसकी बड़ी कमजोरियों को छुपाता है। लिस्ट में हर बड़े सेलेब्रिटी को 'की-पर्सन रिस्क' का सामना करना पड़ता है। कोई एक स्कैंडल या परफॉर्मेंस में गिरावट उनकी ब्रांड वैल्यू को तुरंत खत्म कर सकती है। किसी डाइवर्सिफाइड कॉर्पोरेशन के विपरीत, सेलेब्रिटी एक सिंगल पॉइंट ऑफ फेलियर होता है। साथ ही, कंज्यूमर गुड्स कंपनियों की इन सेलेब्रिटीज़ पर निर्भरता बहुत ज्यादा है। अगर मार्केटिंग का पैसा इन्हीं टॉप स्टार्स पर केंद्रित रहा, तो यह ओवर-सैचुरेशन की ओर ले जाएगा और ब्रांड्स के लिए ROI (रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) कम कर देगा।
भविष्य का आउटलुक: इन्फ्लुएंस मल्टीप्लायर को मापना
आगे चलकर, वैल्यूएशन में रिस्पॉन्सिबिलिटी और ट्रस्ट जैसे मेट्रिक्स का शामिल होना यह दिखाता है कि स्पॉन्सर अब शॉर्ट-टर्म विजिबिलिटी से ज्यादा लॉन्ग-टर्म ब्रांड अलाइनमेंट पर ध्यान दे रहे हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि जैसे-जैसे ये रैंकिंग स्टैंडर्डाइज होंगी, ये प्राइवेट इक्विटी फर्म्स और होल्डिंग कंपनीज़ को उनके एंडोर्समेंट कॉन्ट्रैक्ट्स की स्ट्रक्चरिंग को प्रभावित करेंगी। ऐसा हो सकता है कि फ्लैट फीस की जगह परफॉर्मेंस-बेस्ड रेमुनरेशन को बढ़ावा मिले, जो सीधे इन डिस्टिंक्टिवनेस स्कोर्स से जुड़ा हो।
