Broadcast Audience Research Council (BARC) टीवी रेटिंग सिस्टम को दोबारा पटरी पर लाने के लिए सरकार और Indian Broadcasting and Digital Foundation (IBDF) के साथ बातचीत कर रहा है। इसका मकसद विज्ञापन जगत में अनिश्चितता को खत्म करना और दर्शकों का सटीक डेटा जुटाना है।
बाजार के लिए क्यों है यह जरूरी?
मीडिया इंडस्ट्री के लिए विज्ञापन ही कमाई का मुख्य जरिया है। फिलहाल, विश्वसनीय डेटा न होने के कारण ब्रॉडकास्टर्स को अपने विज्ञापनों की सही कीमत तय करने में मुश्किल हो रही है और ब्रांड्स को भी कैंपेन की सफलता मापने में परेशानी आ रही है। BARC के चेयरमैन और Sony Pictures Networks के सीईओ गौरव बनर्जी ने पुष्टि की है कि एक भरोसेमंद रेटिंग फ्रेमवर्क तैयार करने पर काम जारी है।
पुरानी चुनौतियों से सबक
साल 2020 में TRP (Television Rating Point) हेरफेर के विवाद के बाद इंडस्ट्री में भारी उथल-पुथल मची थी, जिसके चलते रेटिंग सिस्टम पर सवाल उठे थे। अब BARC का नया फोकस पुरानी कमियों को दूर कर फिर से स्टेकहोल्डर्स का भरोसा जीतने पर है। नया सिस्टम बेहद पारदर्शी होगा ताकि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद की गुंजाइश न रहे।
डिजिटल दौर के साथ तालमेल
BARC अब केवल पुराने सिस्टम को ही नहीं, बल्कि डिजिटल मेजरमेंट स्टैंडर्ड्स के साथ तालमेल बैठाने की भी कोशिश कर रहा है। आजकल दर्शक केवल टीवी ही नहीं, बल्कि स्ट्रीमिंग और डिजिटल डिवाइसेस का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में एक ऐसा हाइब्रिड मॉडल तैयार करने की योजना है जो टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स दोनों के व्यूअरशिप डेटा को कैप्चर कर सके।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
मीडिया स्टॉक्स पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह एक बड़ा इवेंट है। रेटिंग सिस्टम की वापसी से ब्रॉडकास्टर्स की कमाई का रास्ता साफ होगा। सरकार के साथ होने वाली इन बातचीत के नतीजों और नए पॉलिसी फ्रेमवर्क पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यही मीडिया कंपनियों की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ तय करेंगे।
