Anthropic के **$1.5 बिलियन** के कॉपीराइट सेटलमेंट में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कई लेखक पब्लिशर्स और एजेंट्स पर उनके हिस्से के पैसे हड़पने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे पूरी पेमेंट प्रक्रिया अधर में लटक गई है।
पेमेंट में कहां आ रही है दिक्कत?
कोर्ट द्वारा मंजूर इस समझौते के तहत, प्रत्येक पाइरेटेड काम के लिए लगभग $3,000 का मुआवजा तय किया गया है। नियम के अनुसार, जो किताबें अभी प्रिंट में हैं, वहां पब्लिशर और लेखक के बीच 50/50 का बंटवारा होना है। लेकिन, जिन किताबों के अधिकार लेखकों के पास वापस आ चुके हैं, उन पर लेखक को 100% राशि मिलनी चाहिए। विवाद तब शुरू हुआ जब पब्लिशर्स ने उन किताबों पर भी हक जताना शुरू कर दिया और लिटरेरी एजेंट्स ने 15% से 25% तक अवैध कमीशन की मांग कर डाली।
सिस्टम की खामियां और रिकॉर्ड-कीपिंग
यह मामला केवल कुछ तकनीकी गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पब्लिशिंग इंडस्ट्री के पुराने और लचर रिकॉर्ड-कीपिंग सिस्टम को उजागर करता है। लेखकों को अपना पूरा पैसा पाने के लिए यह साबित करना पड़ रहा है कि उनके अधिकार 10 अगस्त, 2022 से पहले ही वापस आ गए थे। इस जटिल वेरिफिकेशन प्रक्रिया ने लेखकों पर काम का भारी बोझ डाल दिया है।
भविष्य के जोखिम
जेनरेटिव AI के दौर में यह सेटलमेंट एक बड़ी नजीर है। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि भविष्य में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी मैनेजमेंट को लेकर कंपनियां और पब्लिशर्स जांच के दायरे में रहेंगे। Anthropic पर अभी भी म्यूजिक पब्लिशर्स और अन्य संस्थाओं की ओर से कानूनी मुकदमे चल रहे हैं, जो स्पष्ट करते हैं कि AI सेक्टर के लिए रेगुलेटरी अनिश्चितता और कानूनी खर्च अभी भी बड़े रिस्क हैं।
फिलहाल, लेखकों को सलाह दी जा रही है कि वे सेटलमेंट पोर्टल पर अपने दावों की खुद जांच करें ताकि पब्लिशर्स या एजेंट्स द्वारा उनके हिस्से में की जा रही कटौती को रोका जा सके।
