Amazon Prime Video ने साउथ कोरियन स्टूडियो CJ ENM के साथ एक मल्टी-ईयर डील साइन की है। इस डील के तहत, **100** से ज़्यादा कोरियन टाइटल्स अब भारत में Prime Video पर उपलब्ध होंगे। कंपनी का मकसद हिंदी, तमिल और तेलुगु में डबिंग के साथ कोरियन कंटेंट की बढ़ती डिमांड को भुनाना है।
Detailed Coverage
कंटेंट लाइब्रेरी का बड़ा विस्तार
Amazon Prime Video भारत में अपने कंटेंट कैटलॉग को और मजबूत करने जा रहा है। इसके लिए कंपनी ने साउथ कोरियन मीडिया कंपनी CJ ENM के साथ एक मल्टी-ईयर डिस्ट्रीब्यूशन एग्रीमेंट किया है। इस डील का मुख्य लक्ष्य कोरियन ड्रामा और फिल्मों में बढ़ती रुचि को भुनाना है, जिनका दर्शक वर्ग ग्लोबल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से बढ़ रहा है।
अगले दो सालों में, Prime Video की लाइब्रेरी में 100 से ज़्यादा कोरियन टाइटल्स शामिल किए जाएंगे। इनमें 26 नए शोज के साथ-साथ कई पुराने पॉपुलर शोज भी शामिल हैं। इस बड़ी मात्रा में कंटेंट को जोड़कर, Amazon का लक्ष्य प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की इंगेजमेंट बढ़ाना है। ताकि यह कंटेंट सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित न रहे, इसे इंग्लिश सबटाइटल्स के साथ-साथ हिंदी, तमिल और तेलुगु में भी डब करके उपलब्ध कराया जाएगा।
सब्सक्राइबर एंगेजमेंट पर फोकस
भारतीय स्ट्रीमिंग मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा है और क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय कंटेंट की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में, प्लेटफॉर्म्स एक्सक्लूसिव लाइसेंसिंग डील्स में भारी निवेश कर रहे हैं। Amazon Prime Video, जो Amazon इकोसिस्टम का हिस्सा है (जहां वीडियो सेवाएं ई-कॉमर्स सब्सक्रिप्शन के साथ बंडल की जाती हैं), उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कंटेंट नए यूजर्स को आकर्षित करता है या मौजूदा सब्सक्राइबर्स को बनाए रखने में मदद करता है। कंपनी 'Arthdal Chronicles', 'Sweet Home', और 'Vincenzo' जैसे पॉपुलर शोज के दम पर उन दर्शकों को लुभाने की कोशिश कर रही है जो कोरियन एंटरटेनमेंट वेव से पहले से ही परिचित हैं।
भारतीय OTT मार्केट की प्रतिस्पर्धी स्थिति
भारत का स्ट्रीमिंग सेक्टर बेहद कॉम्पिटिटिव बना हुआ है, जिसमें Netflix, Disney+ Hotstar, और JioCinema जैसे प्लेयर्स मार्केट शेयर के लिए जोर-शोर से लगे हैं। ये प्लेटफॉर्म्स भी युवा दर्शकों को आकर्षित करने वाले कंटेंट को एक्वायर या प्रोड्यूस करने में आक्रामक हैं। स्ट्रीमिंग सर्विसेज के लिए चुनौती यह है कि वे इंटरनेशनल कंटेंट की हाई लाइसेंसिंग कॉस्ट को प्राइस-सेंसिटिव मार्केट में प्रॉफिटेबल ग्रोथ की जरूरत के साथ कैसे संतुलित करें। डोमेस्टिक प्रोडक्शन के विपरीत, जहां क्रिएटिव कंट्रोल ज्यादा होता है, लाइसेंसिंग डील्स में लगातार खर्च आता है जिसे व्यूअर ट्रैफिक और कम चर्न रेट (दर्शकों का कम संख्या में प्लेटफॉर्म छोड़ना) से जस्टिफाई करना पड़ता है।
मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर को ट्रैक करने वाले निवेशकों को यह देखना होगा कि कंटेंट में यह निवेश कंपनी के ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस को कैसे प्रभावित करता है और क्या इससे प्लेटफॉर्म पर बिताए जाने वाले समय में कोई खास बढ़ोतरी होती है। इस पार्टनरशिप का अगला चरण डब किए गए कंटेंट का फेज्ड रोलआउट और विभिन्न भारतीय राज्यों में दर्शकों की प्रतिक्रिया होगी, जो यह तय करेगा कि यह रणनीति प्लेटफॉर्म के लिए लॉन्ग-टर्म वैल्यू पैदा करती है या नहीं।
