YouTube का बड़ा दांव: टॉप क्रिएटर्स को करोड़ों देकर कंटेंट EXCLUSIVE बनाने की तैयारी

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AuthorMehul Desai|Published at:
YouTube का बड़ा दांव: टॉप क्रिएटर्स को करोड़ों देकर कंटेंट EXCLUSIVE बनाने की तैयारी

YouTube अब टॉप क्रिएटर्स को लाखों डॉलर का पेमेंट करके अपने प्लेटफॉर्म पर एक्सक्लूसिव कंटेंट रखने के लिए मना रहा है। यह कदम Netflix के उस मूव का जवाब है जिसमें उसने कई पॉपुलर यूट्यूबर्स को साइन किया था। ये बदलाव YouTube के पुराने रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल से हटकर सीधे कंटेंट फंडिंग की ओर इशारा कर रहा है।

YouTube का नया गेम प्लान

वीडियो स्ट्रीमिंग की दुनिया में अपनी पोजिशन मजबूत बनाए रखने के लिए YouTube अपनी स्ट्रेटेजी बदल रहा है। कंपनी अब टॉप क्रिएटर्स को लाखों डॉलर का इंसेंटिव ऑफर कर रही है, ताकि उनका कंटेंट कुछ समय के लिए सिर्फ YouTube पर ही उपलब्ध रहे। यह कदम सीधे तौर पर Netflix की उस कोशिश का जवाब है, जिसमें वह पॉपुलर यूट्यूब क्रिएटर्स के साथ मिलकर कंटेंट को दोनों प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर रहा है।

बदल रहा है रेवेन्यू मॉडल?

अभी तक YouTube का मुख्य बिजनेस मॉडल ऐड-रेवेन्यू शेयरिंग पर आधारित रहा है, जो प्लेटफॉर्म के लिए काफी कैपिटल-एफिशिएंट है। लेकिन अब, एक्सक्लूसिविटी हासिल करने के लिए सीधे पेमेंट करने की स्ट्रेटेजी Alphabet Inc. को ज्यादा कैपिटल-इंटेंसिव बना रही है, जो किसी बड़े स्टूडियो प्रोडक्शन की तरह है। यह साफ दिखाता है कि व्यूअरशिप और उसे आकर्षित करने वाले टैलेंट को लेकर कॉम्पिटिशन कितना बढ़ गया है।

Netflix का बढ़ता दबदबा और YouTube का जवाब

Netflix पहले ही Alan Chikin Chow और Nick DiGiovanni जैसे क्रिएटर्स के साथ डील कर चुका है, जिससे उनका कंटेंट दोनों प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो रहा है। इस ट्रेंड को रोकने के लिए, YouTube ने क्रिएटर्स को यह संकेत दिया है कि अगर वे अपना कंटेंट Netflix या किसी और कॉम्पिटिटर पर रिलीज करते हैं, तो प्लेटफॉर्म पर उनकी रैंकिंग पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके संभावित नतीजों में YouTube के एल्गोरिथम में कम प्रमोशन, YouTube द्वारा स्पॉन्सर किए गए इवेंट्स से बाहर रखा जाना और भविष्य के बड़े ब्रांड कैंपेन से होने वाली कमाई में कटौती शामिल है।

क्या हैं इसके रिस्क?

हालांकि यह डिफेंसिव स्ट्रेटेजी YouTube की व्यूअरशिप बनाए रखने के लिए है, लेकिन इसमें कुछ बिजनेस रिस्क भी हैं। कंटेंट पर सीधा पैसा खर्च करने से कंपनी की ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ सकती है, जिससे प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है, खासकर अगर इनवेस्टमेंट से उतना रिटर्न न मिले। इसके अलावा, यह उन टॉप क्रिएटर्स को नाराज कर सकता है जो अपने ऑडियंस को बढ़ाने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर रहना पसंद करते हैं। अगर क्रिएटर्स को यह एक्सक्लूसिविटी मैंडेट बहुत ज्यादा रेस्ट्रिक्टिव लगता है, तो यह YouTube की 'क्रिएटर-फर्स्ट' इमेज को नुकसान पहुंचा सकता है।

आगे क्या?

इस इनिशिएटिव की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि YouTube, अपने कोर बिजनेस मॉडल से समझौता किए बिना टैलेंट को कैसे बनाए रखता है। इन्वेस्टर्स Alphabet की भविष्य की अर्निंग रिपोर्ट्स और मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रख सकते हैं कि क्या कंटेंट फाइनेंसिंग में यह बदलाव मीडिया और एंटरटेनमेंट सेगमेंट में ऑपरेटिंग एक्सपेंस को बढ़ाता है। यह भी देखना अहम होगा कि लंबे समय में यह प्लेटफॉर्म इंटरनेट क्रिएटर्स के लिए प्राइमरी डेस्टिनेशन बना रह पाता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.