Allahabad High Court: सरकार के विज्ञापन रोकने पर तीखी टिप्पणी, प्रेस की आजादी पर मंडराया खतरा!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Allahabad High Court: सरकार के विज्ञापन रोकने पर तीखी टिप्पणी, प्रेस की आजादी पर मंडराया खतरा!
Overview

Allahabad High Court ने सरकार के ऐसे आदेशों के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है, जिनसे अखबारों को मिलने वाले सरकारी विज्ञापन रोके जा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कदम 'फोर्थ एस्टेट' यानी मीडिया की स्वायत्तता को गंभीर रूप से खतरे में डाल सकते हैं। यह टिप्पणी अमर उजाला (Amar Ujala) अखबार के खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate) द्वारा सरकारी विज्ञापन रोकने के एक मामले की सुनवाई के दौरान आई।

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कोर्ट ने विज्ञापन रोकने के आदेश पर उठाए सवाल

हाई कोर्ट की बेंच ने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक आदेशों में हमेशा प्रेस की आजादी का सम्मान होना चाहिए। जस्टिस विवेक सरन और जस्टिस अजित कुमार ने साफ कहा कि कोई भी 'तानाशाही आदेश' निश्चित रूप से 'फोर्थ एस्टेट' (मीडिया) की स्वायत्तता का उल्लंघन करेगा। यह अहम टिप्पणी तब आई जब बेंच अमर उजाला लिमिटेड की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में 15 अक्टूबर 2025 के जिला मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें एक गुरुद्वारा विवाद से जुड़ी खबर के बाद कथित तौर पर अखबार को सरकारी विज्ञापन देना बंद कर दिया गया था।

अमर उजाला ने विज्ञापन रोकने को दी चुनौती

अमर उजाला की ओर से दलील दी गई कि जिला मजिस्ट्रेट का यह कदम भेदभावपूर्ण था और जिला प्रशासन के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। खासकर तब, जब अखबार ने 18 सितंबर 2025 को ही एक 'सुधार पत्र' (corrigendum) छापकर पिछली रिपोर्ट को स्पष्ट कर दिया था। कोर्ट ने माना कि अखबार द्वारा 16 सितंबर 2025 के डिविजनल कमिश्नर के आदेश का पालन करते हुए सुधार पत्र जारी करने के बाद विवाद काफी हद तक शांत हो गया था। बेंच ने कहा कि 'छोटी-छोटी बातों' पर ऐसे कदम नहीं उठाए जाने चाहिए, जिनसे मीडिया की स्वतंत्रता से समझौता हो।

कोर्ट ने दिए आगे के निर्देश

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी प्रकाशक के खिलाफ अधिकारियों को कोई शिकायत है, तो उसके लिए उचित कानूनी रास्ते मौजूद हैं। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 17 दिसंबर 2025 को अमर उजाला को एक नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसे ध्यान में रखते हुए, हाई कोर्ट ने अखबार को निर्देश दिया कि वे दो हफ्ते के भीतर जिला मजिस्ट्रेट के सामने एक नया आवेदन दाखिल करें। इसके बाद, मजिस्ट्रेट को एक हफ्ते के भीतर, विशेष रूप से 18 सितंबर 2025 के सुधार पत्र को ध्यान में रखते हुए, एक तर्कसंगत आदेश (reasoned order) पारित करना होगा। इसके बाद याचिका को बंद कर दिया गया।

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