ASCI का बड़ा फैसला: अब AI-जनरेटेड विज्ञापनों पर देना होगा डिस्क्लोजर, कंपनियों की बढ़ेगी जिम्मेदारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ASCI का बड़ा फैसला: अब AI-जनरेटेड विज्ञापनों पर देना होगा डिस्क्लोजर, कंपनियों की बढ़ेगी जिम्मेदारी

Advertising Standards Council of India (ASCI) ने विज्ञापनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं। अब कंपनियों को AI-आधारित कंटेंट की पहचान के लिए लेबल लगाना होगा, जिसके लिए उन्हें **3 महीने** का समय दिया गया है।

नियम का दायरा

ASCI की इस नई गाइडलाइन के तहत, यदि किसी विज्ञापन में AI का इस्तेमाल कंटेंट बनाने या उसे काफी हद तक बदलने के लिए किया गया है, तो उसे स्पष्ट रूप से घोषित करना होगा। यह नियम वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स, AI-जनरेटेड आवाजें, और डिजिटल रूप से तैयार किए गए प्रोडक्ट डेमो पर लागू होता है। ध्यान रहे कि साधारण कलर करेक्शन या सबटाइटलिंग जैसे काम इस नियम के दायरे से बाहर रखे गए हैं।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

मार्केटिंग की दुनिया में यह पारदर्शिता की ओर एक बड़ा कदम है। ई-कॉमर्स, एडटेक और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर की कंपनियां अपनी लागत घटाने के लिए भारी मात्रा में जनरेटिव AI का इस्तेमाल कर रही हैं। अब इन कंपनियों को अपने डिजिटल पाइपलाइन का ऑडिट करना होगा ताकि किसी भी तरह के उल्लंघन से बचा जा सके।

अनुपालन और रिस्क

नियमों का पालन न करने पर न केवल ASCI की सख्ती का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि कंज्यूमर ट्रस्ट पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि लेबल लगाने की सीधी लागत बहुत कम है, लेकिन ऑडिट, टीम की ट्रेनिंग और लीगल चुनौतियों के चलते कंपनियां अपनी मार्केटिंग एफिशिएंसी को लेकर नए सिरे से रणनीति बना रही हैं। आने वाले 3 महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बड़ी कंपनियां किस तरह से अपनी एडवर्टाइजिंग स्ट्रेटजी को इन पारदर्शिता मानकों के अनुरूप ढालती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.