आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बदौलत एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में लागत तेजी से गिर रही है। ऑडियो ड्रामा बनाने का खर्च जो पहले **$2,500** प्रति घंटा था, अब महज **$30** पर आ गया है। JioStar और Pocket FM जैसे बड़े नाम इस टेक्नोलॉजी को अपना रहे हैं, जिससे अब पावर का बैलेंस स्टूडियो से हटकर इंडिपेंडेंट क्रिएटर्स की तरफ शिफ्ट हो रहा है।
AI तकनीक ने भारतीय मनोरंजन जगत के गणित को पूरी तरह बदल दिया है। राइटिंग से लेकर एडिटिंग तक का काम अब ऑटोमेशन के जरिए होने लगा है, जिससे समय और पैसा दोनों की बड़ी बचत हो रही है। इस लागत में आई भारी कमी ने स्टूडियो और क्रिएटर्स के रिश्तों को भी बदल दिया है। पहले फंडिंग के लिए क्रिएटर्स को पूरी तरह बड़े स्टूडियो पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब वे खुद कम बजट में हाई-क्वालिटी कंटेंट तैयार कर अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) पर नियंत्रण रख रहे हैं।
बड़े खिलाड़ियों का AI दांव
इंडस्ट्री के बड़े नाम इस बदलाव को पहले ही भांप चुके हैं। JioStar ने अपना जनरेटिव AI स्टूडियो लॉन्च किया है और 'महाभारत' पर आधारित एक पूरी सीरीज भी पेश की है। वहीं, Balaji Telefilms अपने शो प्रोडक्शन में AI का प्रयोग कर रही है और Kuku Technologies मुंबई में अपनी AI-फोर्स्ड प्रोडक्शन टीम का विस्तार कर रही है।
बाजार की चुनौतियां और रिस्क
हालांकि, केवल कम खर्च से सफलता की गारंटी नहीं मिलती। इसका सबसे बड़ा उदाहरण Pocket FM है, जिसने $500 मिलियन से ज्यादा का एनुअल रिकरिंग रेवेन्यू (ARR) हासिल करने के बावजूद, मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते अपने माइक्रो-ड्रामा ऐप 'Pocket TV' को जून 2026 में बंद कर दिया। इसके अलावा, AI-जनरेटेड कंटेंट की बढ़ती बाढ़ से क्वालिटी गिरने और दर्शकों के बोर होने का खतरा भी बना हुआ है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कंपनियां इन नई तकनीकों, रेगुलेटरी नियमों और क्रिएटिव क्वालिटी के बीच संतुलन कैसे बनाती हैं।
