AI का जलवा, कंटेंट राइटर्स की कमाई घटी! 80% इनकम हुई कम

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AuthorNeha Patil|Published at:
AI का जलवा, कंटेंट राइटर्स की कमाई घटी! 80% इनकम हुई कम

AI टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल से कंटेंट राइटिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आया है। एक प्रोफेशनल कॉपीराइटर की मासिक कमाई **₹2 लाख** से घटकर **₹40,000** रह गई है, जो इस सेक्टर में ऑटोमेशन के असर को दिखाता है।

AI की एंट्री, कमाई पर असर

डिजिटल मीडिया और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दखल तेजी से बढ़ रहा है। इसका सीधा असर पेशेवरों की कमाई पर दिख रहा है। एक ऐसे ही मामले में, एक कॉपीराइटर की मासिक आय ₹2 लाख से गिरकर ₹40,000 हो गई है। वजह है AI टूल्स का इस्तेमाल, जो अब इंसानों द्वारा किए जाने वाले कई कामों को तेजी से कर रहे हैं।

प्रोफेशनल डिमांड में बदलाव

ऑटोमेटेड कंटेंट जेनरेशन के इस दौर में, कई क्रिएटिव प्रोफेशनल्स को फ्रीलांस प्रोजेक्ट्स में कमी और मिलने वाले कामों की प्रकृति में बदलाव का सामना करना पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, हैदराबाद में तेलंगाना टूरिज्म के मार्केटिंग का काम संभालने वाली एजेंसी में जाने के बाद, कॉपीराइटर के काम की जिम्मेदारी पहले से बढ़ी है, लेकिन सैलरी काफी कम हो गई है। यह आज के लेबर मार्केट की एक आम चुनौती है, जहां AI की स्पीड और एफिशिएंसी के कारण नौकरियों की परिभाषा बदल रही है।

क्रिएटिव वर्कप्लेस पर असर

सैलरी में कटौती के अलावा, AI-संचालित वर्कफ़्लो ने वर्कप्लेस कल्चर और इंसानी रचनात्मकता के मूल्य पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इस सेक्टर के प्रोफेशनल्स का मानना है कि AI भले ही बड़ी मात्रा में काम कर सके, लेकिन ऑटोमेटेड माहौल में उत्साह और क्रिएटिव पैशन की कमी कर्मचारियों के लिए एक दूरी पैदा कर सकती है। जो काम पहले बड़ी टीम करती थी, अब अक्सर AI की मदद से एक अकेले कर्मचारी से उम्मीद की जाती है, जो परफॉरमेंस एक्सपेक्टेशन और लॉन्ग-टर्म करियर संतुष्टि पर दबाव डाल सकता है।

सेक्टर में एडजस्टमेंट

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि क्रिएटिव और मार्केटिंग सेक्टर्स फिलहाल ऐतिहासिक तकनीकी बदलावों की तरह ही एडजस्टमेंट के दौर से गुजर रहे हैं। प्रोफेशनल्स के लिए अब AI के साथ कॉम्पिटिशन करने की बजाय, उसे एक टूल के तौर पर इस्तेमाल करने और नई स्किल्स सीखने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। हालांकि, कुछ लोगों के लिए तुरंत कमाई में गिरावट आई है, लेकिन भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां ऑटोमेशन से लागत में कटौती और हाई-क्वालिटी ह्यूमन स्ट्रेटेजी व क्रिएटिव ओवरसाइट की जरूरत के बीच कैसे संतुलन बनाती हैं। जो निवेशक मीडिया और एडवरटाइजिंग सेक्टर पर नजर रख रहे हैं, वे कंपनियों द्वारा इन नई तकनीकों को अपने बिजनेस मॉडल में इंटीग्रेट करने के साथ-साथ एम्प्लॉई-टू-आउटपुट रेशियो को ट्रैक कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.