Rado का भारत में जलवा! टियर-2 शहरों से आ रहा बिज़नेस, CEO बोले - 'चीन जैसा ग्रोथ संभव'

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Author Karan Malhotra | Published at:
Rado का भारत में जलवा! टियर-2 शहरों से आ रहा बिज़नेस, CEO बोले - 'चीन जैसा ग्रोथ संभव'
Overview

स्विट्जरलैंड की लग्जरी घड़ी निर्माता कंपनी Rado भारत में ज़बरदस्त विस्तार कर रही है. कंपनी का **एक-तिहाई** से ज़्यादा का बिज़नेस अब टियर-2 शहरों से आ रहा है. ग्लोबल CEO Adrian Bosshard ने बताया कि कंपनी डबल-डिजिट में ग्रोथ दर्ज कर रही है और बढ़ती आमदनी और महत्वाकांक्षाओं के चलते यह तेजी जारी रहने की उम्मीद है. Rado के लिए भारत पहले से ही वैल्यू के लिहाज़ से सबसे बड़ा मार्केट है और यह जल्द ही चीन की तरह एक बड़ा लग्जरी डेस्टिनेशन बन सकता है. कंपनी अपने स्टोर्स की संख्या सोच-समझकर बढ़ाने पर ध्यान दे रही है.

भारत के लग्जरी मार्केट में Rado का बड़ा दांव

Rado के ग्लोबल CEO Adrian Bosshard को भारत के लग्जरी सेगमेंट में ज़बरदस्त भरोसा है. उनका अनुमान है कि आने वाले सालों में Rado भारत में "वैसा ही ग्रोथ" हासिल करेगा जैसा चीन ने अपने शुरुआती दौर में किया था. उन्होंने कहा कि बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम, युवा आबादी और बढ़ता डिजिटलाइजेशन कंपनी के ग्राहकों का दायरा बढ़ा रहे हैं. Bosshard का मानना है कि अगले एक दशक में भारत दुनिया के टॉप 10-12 लग्जरी मार्केट्स में शामिल हो सकता है.

मेट्रो से आगे, छोटे शहरों में भी धूम

Rado का फोकस सिर्फ भारत के बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है. मौजूदा बिज़नेस का एक-तिहाई से ज़्यादा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहा है. इन छोटे शहरों के ग्राहकों के पास अच्छी-खासी डिस्पोजेबल इनकम है और वे प्रीमियम घड़ियों को लेकर काफी उत्सुक हैं. कंपनी इन इलाकों में अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की क्वालिटी को मज़बूत करने पर काम कर रही है ताकि इस डिमांड का पूरा फायदा उठाया जा सके.

स्टोर्स की स्ट्रैटेजिक ग्रोथ

कंपनी फिलहाल अपने मोनो-ब्रांड स्टोर नेटवर्क को धीरे-धीरे और सोच-समझकर बढ़ाने की योजना बना रही है, जो अभी 34 स्टोर्स पर है. उनकी स्ट्रैटेजी ज़्यादा स्टोर्स खोलने से ज़्यादा क्वालिटी पर ज़ोर देने की है. इसमें प्राइम लोकेशन्स चुनना और ग्राहकों को बेहतरीन अनुभव देना शामिल है. Bosshard ने संकेत दिया है कि अगले 3-4 सालों में स्टोर्स की संख्या बढ़ाकर लगभग 50 तक पहुंचाई जा सकती है.

कस्टम ड्यूटी में कमी का फायदा?

इस बुलिश आउटलुक को एक और चीज़ का सपोर्ट मिल रहा है - आने वाले सालों में भारत में स्विस घड़ियों पर कस्टम ड्यूटी के धीरे-धीरे खत्म होने की उम्मीद. इस पॉलिसी शिफ्ट से लग्जरी स्विस घड़ियों के इम्पोर्ट और बिक्री के लिए एक ज़्यादा फेवरेबल माहौल बनेगा, जो Rado की मार्केट में पकड और शेयर को बढ़ा सकता है.

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