प्रीमियम घड़ियों की बढ़ती मांग इंडिया के लग्जरी मार्केट को नई दिशा दे रही है। ₹1 लाख से ₹5 लाख की कीमत वाली घड़ियों का यह सेगमेंट, जिसकी वैल्यू ₹4,500 करोड़ है, सालाना 23% की रफ्तार से बढ़ रहा है। कंज्यूमर्स अब क्वालिटी, स्टेटस और निवेश के नजरिए से घड़ियां खरीद रहे हैं। यह 'प्रीमियमनाइजेशन' का ट्रेंड लोगों को सोफिस्टिकेटेड डिज़ाइन और हेरिटेज वाली घड़ियों की ओर खींच रहा है, जिन्हें वे अपनी पहचान और अमीरी का प्रतीक मानते हैं।
आने वाले इंडिया-ईएफटीए (EFTA) ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट से इस ग्रोथ को और बल मिलने की उम्मीद है। इस समझौते के पूरी तरह लागू होने के बाद, यूरोपीय घड़ियों पर इम्पोर्ट ड्यूटी अगले सात सालों में धीरे-धीरे 22% से घटकर शून्य हो जाएगी। हालांकि रिटेल कीमतों में तुरंत गिरावट की उम्मीद कम है, लेकिन यह डील ग्लोबल वॉचमेकर्स, खासकर स्विस ब्रांड्स के लिए भारत में ज़्यादा निवेश करने और अमीर कंज्यूमर्स तक पहुंचने का रास्ता आसान करेगी।
अंतरराष्ट्रीय वॉचमेकर्स भारत पर अपना फोकस बढ़ा रहे हैं। वे एयरपोर्ट्स पर विज्ञापन, डिजिटल आउटरीच और इंडियन कल्चर को पसंद आने वाले डिज़ाइन्स पेश करने जैसी रणनीतियां अपना रहे हैं। हाल ही में, जर्मन वॉचमेकर Alexander Shorokhoff ने भारत में एंट्री की है, जो Titan Company के प्रीमियम रिटेल आर्म Helios Luxe के ज़रिए हुई है। यह ब्रांड आर्टिस्टिक, लिमिटेड-एडिशन घड़ियों के खरीदारों को टारगेट करेगा।
भारत के वॉच मार्केट का एक बड़ा प्लेयर Titan Company अपने प्रीमियम ब्रांड्स का विस्तार कर रहा है। कंपनी अगले साल तक बड़े शहरों में 45 Helios Luxe स्टोर्स खोलने की योजना बना रही है और 2030 तक 100 स्टोर्स का लक्ष्य रखती है। यह मार्केट की ग्रोथ पर कंपनी के विश्वास को दिखाता है। कुल मिलाकर, भारतीय वॉच मार्केट का वैल्यूएशन ₹26,000 करोड़ है और यह लगभग 18% की दर से बढ़ रहा है, जिसमें हाई-एंड सेगमेंट का प्रदर्शन कहीं बेहतर है। ग्लोबल लेवल पर, लग्जरी वॉच मार्केट 2026 में $84.77 बिलियन से बढ़कर 2031 तक $114.19 बिलियन होने का अनुमान है, जिसमें एशिया-पैसिफिक क्षेत्र ग्रोथ का नेतृत्व कर रहा है। अकेले भारत का लग्जरी वॉच मार्केट 2033 तक USD 4.79 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसकी सालाना ग्रोथ रेट (CAGR) 9.95% रहने का अनुमान है।
इंडिया का लग्जरी वॉच सेक्टर सिर्फ ग्लोबल ट्रेंड्स को फॉलो नहीं कर रहा, बल्कि अपना एक अलग रास्ता बना रहा है। जहां ग्लोबल डिमांड मैकेनिकल घड़ियों की ओर झुक रही है, वहीं भारत में बढ़ते मिडिल क्लास और युवा खरीदारों का योगदान है, जो घड़ियों को स्टेटस सिंबल और निवेश के तौर पर देखते हैं। इंडिया में प्री-ओन्ड (second-hand) लग्जरी वॉच मार्केट भी तेजी पकड़ रहा है, जो किफायती दाम और उपलब्धता प्रदान करता है। Rolex जैसी कंपनियां 2024 में भारत के लग्जरी वॉच मार्केट वैल्यू का 32% हिस्सा रखती हैं। Rado और Breitling जैसे स्विस ब्रांड अपनी मजबूत मौजूदगी का फायदा उठा रहे हैं। Breitling को उम्मीद है कि ट्रेड पैक्ट मार्केटिंग और रिटेल में ज़्यादा निवेश की अनुमति देगा। स्विस वॉच इंडस्ट्री फेडरेशन की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत को एक्सपोर्ट 25% बढ़ा है। अपने मौजूदा आकार के बावजूद, भारत एक दशक के भीतर स्विस घड़ियों के लिए टॉप-टियर मार्केट बनने की ओर अग्रसर है।
हालांकि, इस सेक्टर में कुछ संभावित जोखिमों पर भी गौर करना ज़रूरी है। Titan Company का P/E रेशियो 76 से 95 के बीच है, जो बताता है कि भविष्य में मजबूत ग्रोथ की उम्मीदें बहुत ज़्यादा हैं। अगर ग्रोथ धीमी पड़ती है तो ऐसे वैल्यूएशन में गलती की गुंजाइश कम होती है। 'एक्सेसिबल लग्जरी' सेगमेंट आर्थिक मंदी या अमीर कंज्यूमर्स के खर्च करने के पैटर्न में बदलाव से प्रभावित हो सकता है। कम ड्यूटी के कारण और ज़्यादा इंटरनेशनल ब्रांड्स के आने से Titan जैसी कंपनियों के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ेगा और मुनाफे पर दबाव आ सकता है। केवल एक खास अमीर वर्ग पर निर्भरता भी जोखिम पैदा करती है।
एनालिस्ट्स (Analysts) Titan Company के लिए सकारात्मक आउटलुक (Outlook) देख रहे हैं, जिसमें अगले 12 महीने के लिए संभावित बढ़त के संकेत हैं। बढ़ती आय और हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) जैसे मजबूत आर्थिक कारक इस ग्रोथ को सपोर्ट कर रहे हैं। लग्जरी रिटेल का छोटे शहरों तक विस्तार और कंज्यूमर्स की बदलती पसंदें मांग को मजबूत बनाए रखेंगी। ट्रेड एग्रीमेंट और प्रीमियमनाइजेशन का ट्रेंड भारत के लग्जरी वॉच मार्केट में और कंसॉलिडेशन (Consolidation) और ग्रोथ को बढ़ावा देगा।