मुंबई के वर्ली में एक रिहायशी इमारत का री-डेवलपमेंट विवादों में फंस गया है। केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, ताकि पास में स्थित INS Trata नेवल बेस की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस कंस्ट्रक्शन को रोका जा सके। सरकार का आरोप है कि BMC ने बिना रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के इसे हरी झंडी दी है।
सुरक्षा का मुद्दा और नियमों की अनदेखी
यह पूरा मामला वर्ली स्थित वृंदावन को-ऑप हाउसिंग सोसाइटी के री-डेवलपमेंट से जुड़ा है। सरकार का तर्क है कि यह इमारत नौसेना के INS Trata बेस से मात्र 100 मीटर की दूरी पर है। याचिका में साफ कहा गया है कि इतनी ऊंचाई वाली इमारत से सैन्य बेस की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है, जिससे सुरक्षा को बड़ा खतरा हो सकता है।
सरकार का कहना है कि साल 2011 के रक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट के 500 मीटर के दायरे में 4 मंजिल से अधिक की इमारत के लिए स्थानीय स्टेशन कमांडर से NOC लेना अनिवार्य है। आरोप है कि वेस्टर्न नेवल कमांड द्वारा 2018 से लगातार मना करने के बावजूद, BMC ने साल 2023 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी।
रियल एस्टेट पर असर
यह मामला मुंबई के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ी चेतावनी है। जिन प्रोजेक्ट्स को पहले ही अनुमति मिल चुकी है, उन्हें अगर बाद में राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर चुनौती दी जाती है, तो इससे डेवलपर्स और निवेशकों की चिंताएं बढ़ जाती हैं। अब बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि क्या ये अनुमति वैध रहेंगी या निर्माण कार्य पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी।
