अमेरिकी कोर्ट ने एडमिनिस्ट्रेशन को बड़ा झटका देते हुए FEMA की उस योजना पर रोक लगा दी है, जिसके तहत काउंटर-टेररिज्म ग्रांट्स को स्थानीय चुनावी नियमों से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। अब शहरों को फंड के लिए मतदान नियमों में बदलाव करने की शर्त नहीं माननी होगी।
कोर्ट का सख्त रुख
अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज आमिर अली ने सरकार की उस नीति को खारिज कर दिया है, जो FEMA के काउंटर-टेररिज्म फंड को स्थानीय चुनावी नियमों से जोड़ने का प्रयास कर रही थी। यह फैसला उन $1 बिलियन से अधिक के सालाना ग्रांट्स पर सीधा असर डालेगा, जो सार्वजनिक स्थानों और महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर को साइबर और फिजिकल खतरों से बचाने के लिए दिए जाते हैं।
क्या थी विवाद की जड़?
प्रशासन की योजना थी कि जो नगरपालिकाएं नए चुनावी मानकों—जैसे नागरिकता सत्यापन और बारकोड सिस्टम की जगह पेपर बैलेट को अपनाना—को नहीं अपनाती हैं, उनका 20% ग्रांट रोक लिया जाए। कोलंबस, नैशविले और अल पासो जैसे शहरों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि FEMA के पास चुनावी नियमों को थोपने का कोई अधिकार नहीं है।
फैसले के मुख्य बिंदु
जज ने अपने 24 पेज के फैसले में साफ किया कि संघीय एजेंसियां कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति के बिना ग्रांट के साथ ऐसी शर्तें नहीं जोड़ सकतीं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि चुनावी प्रशासन और आतंकवाद विरोधी फंड का आपस में कोई सीधा संबंध नहीं है।
निवेशकों और बिजनेस पर असर
यह निर्णय कंपनियों और उन संगठनों के लिए रेगुलेटरी स्पष्टता लाता है जो सरकारी फंड के भरोसे इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स चलाते हैं। अब तक विभाग की ओर से इस फैसले के खिलाफ कोई अपील या टिप्पणी नहीं आई है, जिससे फिलहाल म्यूनिसिपल बजट को मिलने वाली फंडिंग पर अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं।
