अमेरिका में 27 साल से रह रहीं भारतीय मूल की वेंकट वासमसेट्टी को 11 अगस्त को इमिग्रेशन अथॉरिटीज ने हिरासत में ले लिया। यह तब हुआ जब एक इमिग्रेशन जज ने उनकी डिपोर्टेशन (Deportation) प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। विदेश में बिताए समय को लेकर हुए विवाद के चलते उन्हें हिरासत में लिया गया है, जिसके खिलाफ उनके परिवार ने कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है।
27 साल बाद हिरासत में,
भारतीय मूल की वेंकट वासमसेट्टी, जो पिछले 27 सालों से अमेरिका में रह रही हैं और एक पब्लिक स्कूल टीचर हैं, को 11 अगस्त, 2026 को इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) ने हिरासत में ले लिया। यह घटना शार्लोट, नॉर्थ कैरोलाइना में एक रूटीन चेक-इन के दौरान हुई। खास बात यह है कि मई 2026 में ही एक इमिग्रेशन जज ने उनकी डिपोर्टेशन की कार्यवाही को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया था।
विदेश में लंबे समय तक रहने का विवाद,
यह पूरा मामला 2022 में भारत की सात महीने की यात्रा के बाद शुरू हुआ। वासमसेट्टी, जो 2013 से अमेरिका की लॉफुल परमानेंट रेसिडेंट (Lawful Permanent Resident) हैं, अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए भारत गई थीं। हालांकि, COVID-19 संक्रमण और उसके बाद की मेडिकल दिक्कतों के कारण उन्हें अमेरिका लौटने में देरी हुई, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भी भर्ती होना पड़ा। इसके बाद, अमेरिकी इमिग्रेशन अथॉरिटीज ने दावा किया कि इतने लंबे समय तक अमेरिका से बाहर रहने का मतलब है कि उन्होंने अपनी परमानेंट रेसिडेंसी छोड़ दी है। उनके परिवार और वकीलों ने इस दावे का पुरजोर खंडन किया है, यह बताते हुए कि उनका घर, करियर और पारिवारिक संबंध सब अमेरिका में ही हैं।
कानूनी चुनौती और कोर्ट का दखल,
शुरुआती विवाद के बाद, वासमसेट्टी के वकीलों ने उनके अमेरिका में रहने के इरादे को साबित करने के लिए सबूत पेश किए। 19 मई, 2026 को, एक इमिग्रेशन जज ने उनकी डिपोर्टेशन की कार्यवाही रद्द कर दी। इसके बावजूद, 11 अगस्त को एक निर्धारित चेक-इन के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
उनके परिवार ने इसके तुरंत बाद फेडरल कोर्ट में एक इमरजेंसी हैबियस कॉर्पस पिटीशन (Emergency Habeas Corpus Petition) दायर की है। यह एक ऐसी कानूनी याचिका है जो हिरासत में लिए जाने की वैधता को चुनौती देती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वासमसेट्टी की लीगल टीम बॉन्ड हियरिंग (Bond Hearing) की भी मांग कर रही है, क्योंकि सरकार ने भी स्वीकार किया है कि वह शायद बॉन्ड की हकदार हों। कानूनी लड़ाई के अलावा, परिवार उनकी मेडिकल केयर को लेकर भी चिंतित है। वह डायबिटिक हैं और उन्हें नियमित इंसुलिन और विशेष देखभाल की आवश्यकता है, जिसे हिरासत में लेने के बाद ठीक से संबोधित नहीं किया गया था। वह वर्तमान में जॉर्जिया के इरविन काउंटी डिटेंशन सेंटर (Irwin County Detention Center) में हैं।
भारतीय डायस्पोरा के लिए मायने,
यह मामला अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय (Indian Diaspora) और एनआरआई (NRI) के लिए एक बड़ा मुद्दा है। यह अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से जुड़े जोखिमों और परमानेंट रेसिडेंसी स्टेटस की बढ़ती जांच पर प्रकाश डालता है। अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के अनुसार, 180 दिनों से अधिक की अनुपस्थिति को आमतौर पर संदेह की दृष्टि से देखा जाता है, और निवासी पर यह साबित करने का भार होता है कि उनका इरादा अमेरिका में बने रहने का था।
हालांकि इस घटना का सीधे तौर पर शेयर बाजार पर कोई असर नहीं पड़ेगा, यह अमेरिका में भारतीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण रेगुलेटरी और सामाजिक अपडेट है। अब सबकी निगाहें आने वाली बॉन्ड हियरिंग और फेडरल कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। वासमसेट्टी का परिवार उनकी रिहाई की वकालत कर रहा है, और एक टीचर के तौर पर समुदाय में उनके लंबे समय के योगदान पर जोर दे रहा है।
