अमेरिकी अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सरकार की उन नीतियों को असंवैधानिक करार दिया है, जिनके जरिए फिलिस्तीन समर्थक गतिविधियों में शामिल छात्रों के वीजा रद्द किए जा रहे थे।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज नोएल वाइज ने अपना फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि फिलिस्तीन समर्थक सक्रियता के आधार पर किसी गैर-नागरिक को डिपोर्ट करना संविधान के खिलाफ है। अदालत ने पाया कि सरकार द्वारा 'इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट' (Immigration and Nationality Act) का उपयोग राजनीतिक अभिव्यक्ति को दबाने के लिए किया जा रहा था, जो कि 'फर्स्ट अमेंडमेंट' (First Amendment) के तहत मिले बोलने की आजादी के अधिकारों का उल्लंघन है।
कानूनी दांव-पेच और विवाद
यह मामला अगस्त 2025 में 'द स्टैनफोर्ड डेली' (The Stanford Daily) द्वारा दायर मुकदमे से शुरू हुआ था। याचिका में तर्क दिया गया था कि प्रशासन आव्रजन कानूनों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है ताकि कैंपस में हो रहे विरोध और पत्रकारिता को रोका जा सके। जज वाइज ने अपने फैसले में कहा कि सरकार विदेशी नीति के नाम पर विशेष विचारों को निशाना नहीं बना सकती। इससे पहले मैसाचुसेट्स के जज विलियम यंग ने भी इसी तरह की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्हें संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया था।
शिक्षा क्षेत्र पर असर
हालांकि यह फैसला सीधे किसी शेयर बाजार की घटना से नहीं जुड़ा है, लेकिन अमेरिकी शिक्षा और एड-टेक (Ed-tech) सेक्टर के लिए यह एक महत्वपूर्ण रेगुलेटरी अपडेट है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों का प्रवाह अमेरिका के शैक्षिक संस्थानों के लिए बड़ा रेवेन्यू सोर्स है। इस फैसले से छात्रों को तत्काल कानूनी सुरक्षा तो मिली है, लेकिन सरकारी अपील की संभावनाओं के चलते आगे भी कानूनी अनिश्चितता बनी रह सकती है। निवेशकों और मार्केट ऑब्जर्वर्स को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (Department of Justice) इस फैसले को चुनौती देता है या नहीं, क्योंकि इसका असर छात्रों की आवाजाही और संस्थानों की स्थिरता पर पड़ सकता है।
